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Sunday, September 15, 2019

7:26 PM

ओ.एल.इ.डी. ( OLED ) और क्यू-एलईडी ( QLED ) में क्या फर्क है ? ( OLed and QLed Difference )

ओ.एल.इ.डी. ( OLED ) और क्यू-एलईडी ( QLED ) में क्या फर्क है ?

ओ.एल.इ.डी. ( OLED ) और क्यू-एलईडी ( QLED ) में क्या फर्क है ? ( OLed and QLed Difference )
ओ.एल.इ.डी. ( OLED ) और क्यू-एलईडी ( QLED ) में क्या फर्क है ? ( OLed and QLed Difference )

आज के इस पोस्ट में हम ओ.एल.इ.डी. ( OLED ) और क्यू-एलईडी ( QLED )में फर्क जानेंगे। कि इन दोनों में क्या क्या फर्क होता है, और इन दोनों में कलर कितना डिफरेंट हो जाता है। इनके एलईडी पैनल किस तरह से लगी होती है, और इनका क्या वर्क होता है। तो चलिए बिना वक्त गवाएं स्टार्ट कर लेते हैं, हमारा आज का यह पोस्ट।

ओ.एल.इ.डी. ( OLED )


जिस प्रकार आपने  एल.ई.डी. में देखा था, के उसमें डिस्प्ले को रोशनी देने के लिए पीछे एल.ई.डी. का पैनल होता था। पर ओ.एल.इ.डी. ( OLED ) में कोई पैनल नहीं होता है। ओ.एल.इ.डी. में यह होता है, कि हर एक पिक्सल ( Pixels ) के लिए एक एल.ई.डी. होता है। अर्थात हमारे ओ.एल.इ.डी. ( OLED ) के अंदर जितने भी पिक्सल का वह एलईडी होगा। उतना ही उसमें एलईडी लाइट लगा होगा। हर एक पिक्सल के लिए एक एलईडी यूज़ की जाती है। जिससे कि हमारे वीडियो क्वॉलिटी काफी अच्छी हो जाती है, और कंट्रास काफी उभर कर आते हैं। जिससे कि हमें रियल लाइफ एक्सपीरियंस होता है, और यह एलईडी बाकी एल.इ.डी. की तुलना में काफी महंगी आती है। और बहुत ही ज्यादा स्लिम आती है।

खास बात

इस एलईडी की एक और खास बात यह होती है, कि इसमें हर एक पिक्सल के एलईडी को अर्थात, एक पर्टिकुलर एलईडी को हम अपने हिसाब से ऑफ कर सकते हैं, और ऑन कर सकते हैं, और अपने हिसाब से उसको एडजेस्ट भी कर सकते हैं। जिससे कि कोई भी कलर बिल्कुल परफेक्ट दिखाई देता है, और ब्लैक पूरी तरह से ब्लैक दिखाई देता है, और वाइट पूरी तरह से वाइट दिखाई देता है। आपने कभी देखा होगा कि नॉर्मल एलईडी टीवी के अंदर उसका जो डिस्प्ले होता है, उस डिस्प्ले के 8 लेयर होते हैं। जो कि आपको इमेज में दिखाई दे रहा होगा।
LED and OLed Difference
LED and OLed Difference

इन 8 लेयर में से सबसे पीछे वाला जो लेयर होता है, वह बैक लाइट के लिए होता है, और ओ.एल.ई.डी. में इन 8 लेयर में से 5 लेयर एक साथ जुड़ जाते हैं, और सामने के 3 लेयर सेम टू सेम रहते हैं। जिससे कि ओ.एल.ई.डी बहुत ही स्लिम हो जाता है, और नॉर्मल एलईडी की तुलना में यह काफी पतला दिखाई देता है।  आप एक नॉर्मल एल.ई.डी को ले लीजिए, और उसके पास ही ओ एल ई डी को रख दीजिए। आप देखेंगे कि इसमें जो कलर के कंट्रोल्स होते हैं, वह कितने अलग होते हैं। और कितने डिफरेंट हो जाते हैं। और ओ एल ई डी में आप  कर्ब वगैरह काफी आसानी से कर सकते हैं, और आपके वीडियो क्वालिटी या इमेज क्वालिटी में भी कोई फर्क नहीं पड़ता है। इसमें इमेज क़्वालिटी इतनी अच्छी हो जाती है, की आप को एक रियल लाइफ इमेज का अनुभव होता है।

क्यू-एलईडी ( QLED )


दोस्तों क्यू-एलईडी ( QLED ) ओ एल ई डी की तरह ही होता है, इसमें भी हर एक पिक्सल के लिए अलग से एक एलईडी होती है। एक पिक्सल के लिए एक एलईडी, और हर एक पिक्सल इतना क्लियर होता है, इतना साफ होता है, कि आपको ऐसा महसूस होता है, कि वह बिल्कुल आपके सामने ही हो।

मतलब के जो वीडियो आप देख रहे हैं, वह ऐसा लगता है, कि आपके सामने ही वह सब हो रहा है। इतना क्लियर इसका वीडियो क्वालिटी है। और इतना साफ दिखाई देता है, कि आपको एक रियल लाइफ एक्सपीरियंस देता है। और दोस्तों इसकी कॉस्ट की बात करें, तो यह बहुत ही ज्यादा कॉस्टली आता है, मतलब कि यह बहुत ही ज्यादा महंगा आता है। एक आम आदमी इस एलईडी टीवी को नहीं खरीद सकता है। क्योंकि इसकी प्राइस नॉर्मल एलईडी की तुलना में काफी ज्यादा महंगी होती है।

क्यू-एलईडी ( QLED ) लगाने के बाद ऐसा लगेगा आपको

इसकी मेगापिक्सल भी बहुत ज्यादा होती है। और अगर आपके घर में क्यू-एलईडी ( QLED ) टीवी लगा हुआ है, तो आपको देखने पर ऐसा महसूस होगा, कि यहां कोई टीवी लगा हुआ ही नहीं है, यहाँ एक पेपर लगा हुआ है, ऐसा लगेगा आपको। क्योंकि यह इतना पतला, इतना स्लिम होता है, कि आपको देखने में यह बिल्कुल पेपर की तरह लगेगा। आपको ऐसा लगेगा कि आपके सामने कोई फोटो चिपका रखी हो। इतना पतला होता है, यह।
क्यों एलईडी टीवी का हर एक पिक्सेल इतना क्लियर इमेज लेकर आता है, इतना क्लियर कलर लेकर आता है, कि आप यकीन नहीं कर सकते के, यह असल में टीवी ही है या कोई फोटो।

दोस्तों इस एलईडी टीवी में काफी ज्यादा हाई क्वालिटी की टेक्नोलॉजी यूज़ में ली गई है। इसीलिए इसमें रेट का इतना फर्क पड़ जाता है, कि यह काफी ज्यादा महंगा हो जाता है, और काफी ज्यादा पतला भी हो जाता है।

NOTE :-


तो दोस्तों अब तक आपको समझ में आ गया होगा कि ओ.एल.इ.डी. ( OLED ) और क्यू-एलईडी ( QLED ) में क्या फर्क होता है, और यह दोनों क्यों इतने महंगे आते हैं। अगर आपको नॉरमल एलइडी या सीटीआर टीवी के बारे में जानना है, तो आप हमारे पिछले पोस्ट को पढ़ें। 

अगर आपको हमारा यह पोस्ट पसंद आया है, तो हमें कमेंट करके बताना ना भूलिए। साथ ही साथ अपने दोस्तों को भी शेयर कीजिए, जिससे कि उन्हें पता चल सके कि इन में क्या फर्क होता है, और आपके लिए कौन सा एलइडी टीवी बेस्ट रहेगा। 
6:04 PM

एल.ई.डी. और ओ.एल.इ.डी. ( OLED ) में क्या फर्क होता है ( LED and OLED difference )

एल.ई.डी. और ओ.एल.इ.डी. ( OLED ) में क्या फर्क होता है?

दोस्तों आज के इस पोस्ट में हम एल.ई.डी. और ओ.एल.इ.डी. ( OLED ) के बारे में विस्तार से जानेंगे।
पिछले पोस्ट में हमने एलसीडी और एलईडी में क्या फर्क होता है। वह पता किया था। और आज के इस पोस्ट में हम एलईडी और ओ.एल.ई.डी. ( OLED ) में फर्क जानेंगे। तो चलिए बिना वक़्त गवाए शुरू कर लेते हैं।
LED vs OLED
LED vs OLED

एल.ई.डी. ( LED )



दोस्तों एल.ई.डी. ( LED ) का फुल फॉर्म लाइट एमिटिंग डायोड ( Light emitting diode ) होता है।
दोस्तों एल.सी.डी. और एल.ई.डी. में कोई ज्यादा डिफरेंस नहीं होता है। इसके अंदर भी वही क्रिस्टल होते हैं, जो कि लिक्विड क्रिस्टल है। सेम एल.ई.डी. में भी वही क्रिस्टल होते हैं। बस जो बैक साइट से जो हम लाइट देते हैं, वह बिल्कुल पूरे डिस्प्ले के बैक साइड में एल.ई.डी. की पैनल्स बनी होती है। और उस पैनल्स में भी जो रौशनी करने के लिए जो पैनल्स होते हैं, वह पैनल्स काफी छोटे छोटे होते हैं, जो पूरे डिस्प्ले में लगे होते हैं, और जो एल.ई.डी. होती है, वह कई सारी एल.ई.डी. एक साथ मिलकर एक ग्रुप बनाती है, और उस ग्रुप को हम एलईडी पैनल कहते हैं।
जो कि पूरे डिस्प्ले के बैक साइड में फैली होती है।

चूँ कि यह एल.ई.डी. ( LED ) है, और यह एल.ई.डी. ( LED ) काफी पतली भी बन सकती है। यही कारण है, की एल.सी.डी. से एल.ई.डी. काफी पतला होता है। और एल.ई.डी. को काफी स्लिम बनाया जा सकता है। और दूसरा जो इसमें फायदा होता है, वह यह होता है, कि एल.ई.डी. टीवी काफी कम करंट की खपत करती है। अर्थात एल.इ.डी. को चलाने के लिए काफी कम करंट की जरूरत पड़ती है। जिससे हमारे बिजली की भी बचत होती है।

ओ.एल.इ.डी. ( OLED )


जिस प्रकार आपने  एल.ई.डी. में देखा था, के उसमें डिस्प्ले को रोशनी देने के लिए पीछे एल.ई.डी. का पैनल होता था। पर ओ.एल.इ.डी. ( OLED ) में कोई पैनल नहीं होता है। ओ.एल.इ.डी. में यह होता है, कि हर एक पिक्सल ( Pixels ) के लिए एक एल.ई.डी. होता है। अर्थात हमारे ओ.एल.इ.डी. ( OLED ) के अंदर जितने भी पिक्सल का वह एलईडी होगा। उतना ही उसमें एलईडी लाइट लगा होगा। हर एक पिक्सल के लिए एक एलईडी यूज़ की जाती है। जिससे कि हमारे वीडियो क्वॉलिटी काफी अच्छी हो जाती है, और कंट्रास काफी उभर कर आते हैं। जिससे कि हमें रियल लाइफ एक्सपीरियंस होता है, और यह एलईडी बाकी एल.इ.डी. की तुलना में काफी महंगी आती है। और बहुत ही ज्यादा स्लिम आती है।

ओ.एल.ई.डी. खास बात

इस एलईडी की एक और खास बात यह होती है, कि इसमें हर एक पिक्सल के एलईडी को अर्थात, एक पर्टिकुलर एलईडी को हम अपने हिसाब से ऑफ कर सकते हैं, और ऑन कर सकते हैं, और अपने हिसाब से उसको एडजेस्ट भी कर सकते हैं। जिससे कि कोई भी कलर बिल्कुल परफेक्ट दिखाई देता है, और ब्लैक पूरी तरह से ब्लैक दिखाई देता है, और वाइट पूरी तरह से वाइट दिखाई देता है। आपने कभी देखा होगा कि नॉर्मल एलईडी टीवी के अंदर उसका जो डिस्प्ले होता है, उस डिस्प्ले के 8 लेयर होते हैं। जो कि आपको इमेज में दिखाई दे रहा होगा।
एल.ई.डी. और ओ.एल.इ.डी. ( OLED ) में क्या फर्क होता है ( LED and OLED difference )
एल.ई.डी. और ओ.एल.इ.डी. ( OLED ) में क्या फर्क होता है ( LED and OLED difference )

इन 8 लेयर में से सबसे पीछे वाला जो लेयर होता है, वह बैक लाइट के लिए होता है, और ओ.एल.ई.डी. में इन 8 लेयर में से 5 लेयर एक साथ जुड़ जाते हैं, और सामने के 3 लेयर सेम टू सेम रहते हैं। जिससे कि ओ.एल.ई.डी बहुत ही स्लिम हो जाता है, और नॉर्मल एलईडी की तुलना में यह काफी पतला दिखाई देता है।  आप एक नॉर्मल एल.ई.डी को ले लीजिए, और उसके पास ही ओ एल ई डी को रख दीजिए। आप देखेंगे कि इसमें जो कलर के कंट्रोल्स होते हैं, वह कितने अलग होते हैं। और कितने डिफरेंट हो जाते हैं। और ओ एल ई डी में आप  कर्ब वगैरह काफी आसानी से कर सकते हैं, और आपके वीडियो क्वालिटी या इमेज क्वालिटी में भी कोई फर्क नहीं पड़ता है। इसमें इमेज क़्वालिटी इतनी अच्छी हो जाती है, की आप को एक रियल लाइफ इमेज का अनुभव होता है।

NOTE :-
तो दोस्तों, आपको हमारा आज का यह पोस्ट कैसा लगा। हमें कमेंट करके जरूर बताइए और दोस्तों आगे की पोस्ट में मैं क्यों एलईडी ( Q-LED )के बारे में बताने जा रहा हूं, तो प्लीज आगे वाला पोस्ट जरूर पढ़ें, और अगर मैं उस पोस्ट को लिख देता हूं, तो आपको नीचे उसका लिंक मिल जाएगा। तो चलिए चलते हैं, और मिलते हैं, नेक्स्ट पोस्ट पर। 

4:22 PM

एल.सी.डी. (LCD) और एल.ई.डी. (LED) में क्या फर्क होता है? ( Lcd And what is the difference between LED? )

एल.सी.डी. (LCD) और एल.ई.डी. (LED) में क्या फर्क होता है?

Lcd And what is the difference between LED?
Lcd And what is the difference between LED?

दोस्तों आज के इस पोस्ट में हम एल.सी.डी. और एल.ई.डी. में फर्क जानेंगे। की एल.सी.डी. और एल.ई.डी. में क्या फर्क होता है।
और कौन सा ज्यादा अच्छा है। और अच्छा है, तो क्यों अच्छा है ? इन सभी बातों के बारे में आज के इस पोस्ट में हम जानेंगे। तो चलिए बिना वक्त शुरू कर लेते हैं।

एल.सी.डी. (LCD)

LCD का full form " लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले ( liquid crystal display ) " होता है।
एल.सी.डी. में जो डिस्प्ले होता है, उस डिस्प्ले में सामने की तरफ जो लेयर होती है। उसमें आर.जी.बी. ( RGB ) कलर के तीन कलर के क्रिस्टल होते हैं, और वहीं से कलर प्रोड्यूस होता है। और इन तीन कलर के क्रिस्टल से ही नया कलर बनता है। और यह तीन कलर ही डिसाइड करते हैं, कि डिस्प्ले में एक पर्टिकुलर  जगह पर कौन सा कलर होना चाहिए। तो दोस्तों इन तीन कलर के क्रिस्टल की वजह से हमारा कलर तो प्रोड्यूस हो गया। पर बिना लाइट ( Light ) के हमें डिस्प्ले में कुछ दिखाई नहीं देने वाला है। और जब दिखाई नहीं देगा, तो इन तीनों कलर का कोई मायने ही नहीं होता। इसीलिए एल.सी.डी. में बैक साइड की तरफ सी.सी.एफ.एल. ( CCFL ) लगा होता है। जिस तरह से हमारे घरों में रोशनी करने के लिए हम सी.एफ.एल बल्ब लगाते हैं, उसी प्रकार कंप्यूटर के डिस्प्ले को रोशनी देने के लिए कंप्यूटर में जो डिस्प्ले होता है, उसके बैक साइड में सी.सी.एफ.एल. लगा होता है।
दोस्तों एलसीडी दिखने में काफी पतला होता है, और काफी आकर्षक भी होता है। पर आकर्षक होने के साथ-साथ एलसीडी में कुछ खामियां भी हैं, जो आपको पता होना जरूरी है।

एल.सी.डी. ( LCD ) की कमियां :-


दोस्तों जब आप एल.सी.डी. के सामने की तरफ बिल्कुल सीधे बैठ कर देखोगे, तो आपको जो भी डिस्प्ले में दिख रहा होगा, वह बिल्कुल साफ साफ दिखाई देगा। और जब आप एल.सी.डी. के एक साइड में हो जाएंगे। दाएं या बाएं तरफ। किसी भी एक साइड में हो जाएंगे, तो आपका एल.सी.डी. डिफोकस होने लगेगा। अर्थात उसके कलर कंट्रास्ट बिगड़ने लगेंगे, और आपको एलसीडी में कला-कला दिखाई देने लगेगा, और आपको एलसीडी साफ दिखाई नहीं देगा।
यह एल.सी.डी. की सबसे बड़ी कमी है।
अब हम एल.ई.डी. ( LED ) के बारे में जानेंगे।

एल.ई.डी. ( LED )


दोस्तों एल.ई.डी. ( LED ) का फुल फॉर्म लाइट एमिटिंग डायोड ( Light emitting diode ) होता है।
दोस्तों एल.सी.डी. और एल.ई.डी. में कोई ज्यादा डिफरेंस नहीं होता है। इसके अंदर भी वही क्रिस्टल होते हैं, जो कि लिक्विड क्रिस्टल है। सेम एल.ई.डी. में भी वही क्रिस्टल होते हैं। बस जो बैक साइट से जो हम लाइट देते हैं, वह बिल्कुल पूरे डिस्प्ले के बैक साइड में एल.ई.डी. की पैनल्स बनी होती है। और उस पैनल्स में भी जो रौशनी करने के लिए जो पैनल्स होते हैं, वह पैनल्स काफी छोटे छोटे होते हैं, जो पूरे डिस्प्ले में लगे होते हैं, और जो एल.ई.डी. होती है, वह कई सारी एल.ई.डी. एक साथ मिलकर एक ग्रुप बनाती है, और उस ग्रुप को हम एलईडी पैनल कहते हैं।
जो कि पूरे डिस्प्ले के बैक साइड में फैली होती है।

चूँ कि यह एल.ई.डी. ( LED ) है, और यह एल.ई.डी. ( LED ) काफी पतली भी बन सकती है। यही कारण है, की एल.सी.डी. से एल.ई.डी. काफी पतला होता है। और एल.ई.डी. को काफी स्लिम बनाया जा सकता है। और दूसरा जो इसमें फायदा होता है, वह यह होता है, कि एल.ई.डी. टीवी काफी कम करंट की खपत करती है। अर्थात एल.इ.डी. को चलाने के लिए काफी कम करंट की जरूरत पड़ती है। जिससे हमारे बिजली की भी बचत होती है।

note :- 


तो दोस्तों एल.सी.डी. और एल.ई.डी. में क्या फर्क होता है, आपको अब तक पता चल गया होगा। अगर आपको हमारा यह पोस्ट पसंद आया हो तो, हमें कमेंट करके जरूर बताइए। साथ ही साथ अगर आपको कोई कंफ्यूजन है, या कुछ हमसे पूछना है, या किसी टॉपिक के बारे में जानना है। किस चीज के बारे में जानना है। तो आप हमसे कमेंट करके पूछ सकते हैं। हम आपके प्रॉब्लम का सलूशन देने की पूरी तरह से कोशिश करेंगे। 

Wednesday, September 11, 2019

10:02 PM

CRT monitor or LCD में क्या अंतर होता है | ( What is the difference between CRT monitor or LCD )

CRT monitor or LCD में क्या अंतर होता है? ( What is the difference between CRT monitor or LCD )

CRT monitor or LCD में क्या अंतर होता है?
CRT monitor or LCD में क्या अंतर होता है?

दोस्तों आज के इस पोस्ट में हम सीआरटी मॉनिटर (CRT monitor) और LCD एलसीडी में क्या फर्क होता है, इसके बारे में जानेंगे। और मैं अपनी पोस्ट में ज्यादा टेक्निकली बात नहीं करूंगा, मैं सीधे-सीधे एक उदाहरण के तौर पर आपको समझाने की कोशिश करूंगा, कि असल में यह क्या होता है। क्योंकि इसके अंदर के सर्किट को सही से समझाने के लिए यह बहुत बड़ा  पोस्ट बन जाएगा इसलिए मैं अंदर के सर्किट वगैरह की बात, इस पोस्ट में नहीं करूंगा। मैं सीधे तौर पर आपको बताऊंगा, कि एलसीडी और सीआरटी मॉनिटर में क्या फर्क होता है। तो चलिए बिना वक्त गवाह शुरू कर लेते हैं।

सीआरटी मॉनिटर ( CRT monitor )


दोस्तों सीआरटी का फुल फॉर्म कैथोड रे ट्यूब ( Cathode Ray Tube ) होता है।
दोस्तों आपने पुराने जमाने में देखा होगा, कि जो हमारे सीआरटी टीवी होती थी। जिसके अंदर हम मूवीस (movies) वगैरह देखा करते थे। यह काफी बड़े साइज में आते थे, और काफी भारी भरकम आते थे। इनको सीआरटी मॉनिटर इसलिए कहा जाता है, क्योंकि उनके नाम में ही पता चल जाता है, कि यह एक रे ( RAY ) के ऊपर चलते थे। मतलब के इसके अंदर जो ट्यूब होता है, ट्यूब के अंदर से रे ( RAY ) निकलती है, जिसे आजकल लेजर कहा जाता है। तो लेजर की तरह ही किरणे निकलती थी। उसी रे की मदद से मॉनिटर पर हमें सब कुछ दिखाई देता था, और इसका जो डिस्प्ले होता था, उस डिस्प्ले में फॉस्फोरस ( phosphorus ) की कोटिंग की हुई रहती थी।
और उसी फास्फोरस की वजह से ही हमारे डिस्प्ले में कलर प्रदर्शित होता था। वैसे तो इसमें काफी सारी बातें हैं, पर दोस्तों इस एक पोस्ट में मैं आपको इतना कुछ नहीं बता सकता। इसके लिए मैं एक अलग पोस्ट लिख दूंगा। तो चलिए सीआईडी के बारे में कुछ और बातें जान लेते हैं।

कुछ अन्य बाते जाने :-


दोस्तों सीआरटी मॉनिटर काफी पुराने हैं, क्योंकि आज के जमाने में इनका उपयोग नहीं किया जाता। पर काफी टाइम पहले जब एलसीडी और एलईडी नहीं आई थी। तब सीआरटी मॉनिटर ही मिलते थे, और काफी भारी भरकम होते थे, और यह जो मॉनिटर आते थे। यह काफी ज्यादा बिजली की खपत करते थे। अर्थात  इन टीवियो ( TV ) को चलने में काफी ज्यादा बिजली लगती थी। जिससे कि बिजली का बिल भी काफी ज्यादा आता था। पर जब से एलसीडी आया है, तब से इन सीआरटी मॉनिटर का उपयोग काफी कम हो गया है, और अब आपको यह मॉनिटर  बहुत मुश्किल से देखने को मिलेंगे।
अब हम एलसीडी ( LCD ) के बारे में जानते हैं।

एलसीडी ( LCD )


दोस्तों एलसीडी का फुल फॉर्म लिक्विड क्रिस्टल डिस्पले ( Liquid crystal display ) होता है।
एलसीडी में जो डिस्प्ले होता है, उस डिस्प्ले में सामने की तरफ जो लेयर होती है, उसमें आर.जी.बी कलर ( RGB Color ) के, तीन कलर के क्रिस्टल होते हैं।  और वहीं से कलर प्रोड्यूस होता है।

तो इन क्रिस्टल की वजह से कलर तो प्रोड्यूस हो गया। पर खाली कलर प्रोड्यूस होने से तो आपको कुछ दिखाई नहीं देगा। उसके लिए आपको लाइट की भी जरूरत पड़ेगी। क्योंकि बिना किसी चीज पर लाइक पड़े, आपको कुछ दिखाई तो दे नहीं सकता। अब आप अंधेरे में अगर कोई चीज देखने की कोशिश करोगे, तो आपको दिखाई नहीं देगा। आपको उस चीज को देखने के लिए, कमरे में रोशनी करनी पड़ेगी।

उसी प्रकार एलसीडी में सभी तरह के कलर्स को देखने के लिए हमें रोशनी की जरूरत पड़ती है, उसके लिए एलसीडी के पीछे की साइड सी.सी.एफ.एल ( CCFL ) लगा होता है। जिस प्रकार हमारे घर में रोशनी करने के लिए सीएफएल लगा होता है, उसी प्रकार एलसीडी में डिस्प्ले को रोशनी देने के लिए सी.सी.एफ.एल ( CCFL ) लगा होता है, और जब सी.सी.एफ.एल की लाइट डिस्प्ले पर गिरती है, तो हमें पूरा डिस्प्ले सही से दिखाई देता है।
एलसीडी सीआरटी मॉनिटर के मुकाबले 10 गुना पतला होता है।

एलसीडी के कुछ असुविधाएं :- 


एलसीडी में ब्लैक कलर पूरी तरह से ब्लैक नहीं दिखाई देता है। उस ब्लैक कलर में हल्का सा फर्क आ जाता है। जिसकी वजह से वह ग्रे कलर में दिखाई देने लगता है। हालांकि यह पूरी तरह से हमें पता नहीं चल पाता। पर असल में देखा जाए तो कलर में फर्क जरूर आ जाता है।

अगर आप एल.सी.डी को एकदम सीधा और सामने की तरफ बैठ कर देखेंगे, तो आपको एल.सी.डी में सब कुछ बिल्कुल क्लियर ( clear ) दिखेगा, और एकदम साफ साफ दिखेगा। पर उसी जगह अगर आप एलसीडी के एक किसी भी एक साइड में अगर बैठ कर देखेंगे, तो आपको दिखेगा की कलर में थोड़ी बहुत बदलाव आ गए हैं, और एक तरफ से आपको काला दिखाई देने लगेगा। यह एल.सी.डी की एक बुरी बात है।

note :-

पर एल.सी.डी के मुकाबले एल.ई.डी. ( LED ) में काफी फर्क पड़ जाता है, और आपको काफी क्लियर दिखाई देता है। जिसके बारे में मैं नेक्स्ट पोस्ट में आपको बता दूंगा, और अगर मैं यह पोस्ट लिख देता हूं, तो आपको नीचे लिंक मिल जाएगा, या आप सर्च बार में सर्च ( Search ) करके भी देख सकते हैं।

दोस्तों आज के इस पोस्ट में बस इतना ही। अगर आपको हमारा पोस्ट पसंद आया हो, तो हमें कमेंट करके जरूर बताइए, और अगर कुछ कंफ्यूजन है, तो हमें प्लीज कमेंट करके बताइए। हम आपकी कंफ्यूजन को दूर करने की कोशिश करेंगे। 

Thursday, September 5, 2019

3:31 PM

सी.पी.यू. ( CPU ) में हर्ट्ज क्या होता है ? ( What is Hertz in CPU? )

सी.पी.यू. ( CPU ) हर्ट्ज क्या होता है ?

सी.पी.यू. ( CPU ) में हर्ट्ज क्या होता है ? (What is Hertz in CPU? )
सी.पी.यू. ( CPU ) में हर्ट्ज क्या होता है ? (What is Hertz in CPU? )

दोस्तों आज के इस पोस्ट में हम यह जानेंगे, कि सीपीयू (CPU)  के ऊपर जो हर्ट्ज लिखा हुआ होता है, जो मेगाहर्ट्ज और गीगाहर्ट्स लिखा होता है, वह आखिर क्या होता है, और उनका सीपीयू में क्या काम है। तो चलिए बिना वक्गा शुरू कर लेते हैं।

दोस्तों आप कई बार दुकानों में जाते हैं, और कहते हैं, कि मुझे एक कंप्यूटर चाहिए। जो अच्छा वर्क करें। तो दुकान वाला आपको कहता है, कि आपको कौन लेना है। फिर वह आपके सामने कई सारे सीपीयू और उसकी फ्रिकवेंसी के बारे में बताता है। कि यह सीपीयू (CPU) 1 हर्ट्ज का है, यह सीपीयू (CPU) 2.3  हर्ट्ज का है। यह सीपीयू 2.5 गीगाहर्ट्ज का है। ऐसे कई सारे ऑप्शन दे देता है, और आप को बताता है, कि यह आपके लिए अच्छा होगा, पर तभी आप कंफ्यूज हो जाते हैं, कि यार आखिर गीगाहर्ट्ज क्या होता है। यह किस बला का नाम है, तो आज इसी बारे में हम इस पोस्ट में विस्तार से जानेंगे।

दोस्तों आपने कभी अगर सीपीयू देखा होगा, तो सीपीयू के ऊपर लिखा होता है, 2.5 गीगाहर्ट्ज,  3.1 गीगाहर्ट्स, 3.2 गीगाहर्ट्ज 1.5 गीगाहर्ट्ज तो चलिए हम जान लेते हैं, कि आखिर यह गीगाहर्ट्ज में हर्ट्ज क्या होता है।

गीगाहर्ट्ज में हर्ट्ज क्या होता है


दोस्तों हर्ट्ज का मतलब होता है, कि किसी चीज का बंद और चालू होना। तो सबसे पहले इसका एक साइकिल को समझ लेते है।  अगर आप एक साइकिल को अच्छे से समझ गए, तो इसका पूरा बायोडाटा जान जाएंगे।

जैसे कि डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स होता है, वह कोडिंग पर चलता है, और यह पूरा कोडिंग 0 1 0 1 पर होता है. जैसे कि आप मान लीजिए किसी चीज में आप सप्लाई देते हैं. तो वह जीरो से वन की तरफ जाता है. वन से वापस जीरो की तरफ आ जाता है। यह अप डाउन अप डाउन होता रहता है, और इसको कहते हैं हाई लो हाई लो होना। और जब पावर वन पर आता है, तो वह हाई हो जाता है। और जब पावर शून्य पर आता है, तो वह लो हो जाता है। तो हमारी फ्रिक्वेन्सी  कुछ इसी तरह कार्य करती है, तो इसका जो एक साइकल होता है, वह हाई जा कर लो की तरफ जब आता है, तब वह एक साइकिल कंप्लीट होता है। मतलब के एक बार बंद हो कर एक बार चालू होना। चाहे वह किसी भी सर्किट में पावर दे रहे हो, जब वह सर्किट एक बार बंद होकर चालू होता है, तो उसे एक साइकिल कहा जाता है। और एक साइकिल जब पूरा होता है, उसको हम 1 हर्ट्ज कहते हैं। मतलब के एक बार जब हम किसी सर्किट में पावर देते हैं, तो वह जब एक बार चालू होकर बंद हो जाता है, तो उस एक बार चालू हो के बंद होने को हम  1 हर्ट्ज कहते हैं।
तो दोस्तो आप कब तक आप को यह पता चल गया होगा, कि 1 हर्ट्ज क्या होता है।

अब हम समझेंगे कि मेगा हर्ट्ज और गीगाहर्ट्ज क्या होते हैं?

MHz or GHz kya hota he
MHz or GHz kya hota he

दोस्तों एक मेगाहर्ट्ज का मतलब होता है, वन मिलियन हर्ट्ज। और वन मिलियन का मतलब होता है, कि 10 लाख  हर्ट्ज।
उसी तरह 1 गीगाहर्ट्ज का मतलब होता है, वन बिलियन गीगाहर्ट्ज। और 1 बिलियन की गीगाहर्ट्ज का मतलब होता है, 100 करोड़ गीगाहर्ट्ज।

दोस्तों तो आप इस बात से यह अच्छे से समझ सकते हैं, कि  अगर आपके कंप्यूटर में जो सीपीयू होता है। उस सीपीयू के ऊपर अगर 1 गीगाहर्ट्ज लिखा हुआ है, तो आप इस बात से यह समझ जाइए कि, वह सी पी यू एक सेकंड में 100 करोड़ बार बंद चालू होता है। तो इस बात से आप अंदाजा लगा सकते होंगे, कि हमारे सीपीयू को कितने एक्यूरेसी के साथ काम करना पड़ता है। एक्चुअली दोस्तों हमारे सीपीयू के अंदर एक क्लॉक लगा हुआ होता है, और वह क्लॉक ही इसके हर्ट्ज को कंट्रोल करती है, कि हमारा सीपीयू कितनी बार बंद चालू होगा, 1 सेकेंड के अंदर।

उदाहरण :-

What is Hertz
What is Hertz

दोस्तों उदाहरण के तौर पर अगर मैं आपको बताऊं, तो हमारे घरों में जो बिजली आती है, वह बिजली 50 हर्ट्ज की होती है मतलब कि वह करंट 1 सेकेंड के अंदर 50 बार बंद चालू होता है। मतलब के उसका जो वोल्टेज और करंट होता है, वह जीरो से वन की तरफ जाते और वहां से वापस जीरो की तरह आता है। यह एक साइकिल की तरह होता है, जिसका इमेज आपको इस पोस्ट में देखने को मिल जाएगा, कि किस तरह से हमारा घर का जो करंट आता है जो ऐसी करंट होता है, वह किस तरह से बहता है।

मतलब के हमारे घरों में जो करंट आता है, वह 1 सेकेंड के अंदर 50 बार हाई-लो हाई-लो  होता है, पर यह इतनी तेजी से होता है, कि हमें पता नहीं चलता। मान लीजिए की हमारे घर में जो बल्ब जलता है, वह बल्ब 50 बार 1 सेकेंड के अंदर बंद चालू बंद चालू होता है। पर वह इतना फास्ट होता है, कि आपको दिखाई नहीं देता। क्योंकि एक सेकंड में अगर कोई चीज 50 बार जलती है, तो आपको दिखाई नहीं देगा। वह आपको एक समान दिखेगा।


यह जानना आपके लिए जरूरी है


 दोस्तों अब आप कहेंगे, कि जो हमारे dual-core और पेंटीअम सीरीज के सीपीयू आते थे। उसके अंदर 3 पॉइंट 3 गीगाहर्ट्स के सीपयु  आते हैं, और जो हमारा कोर I5 सीपीयू होता है, वह सीपीयू 3:1 गीगाहर्टज का होता है, तो क्या डुएल कोर सीपीयू कोर I5 सीपीयू से ज्यादा अच्छा है। क्योंकि इसमें गीगाहर्टज ज्यादा है, पर दोस्तों मैं यह बात आप को साफ कर देना चाहता हूं, कि dual-core से ज्यादा अच्छा कोर I5 सीपीयू है। क्योंकि अगर आपने मेरा पिछला पोस्ट पढ़ा होगा, तो आपको अच्छे से समझ में आ जाएगा, कि कोर i5 डुएल कोर से क्यों ज्यादा अच्छा है। आपको शॉर्ट में मैं बता देता हूं, कि सीपीयू कई सारे ट्रांजिस्टर से मिलकर बना होता है। एक सीपीयू के अंदर लाखों करोड़ों की संख्या में  ट्रांजिस्टर होते हैं। अब यह डिपेंड करता है, कि आपके सीपीयू में ट्रांजिस्टर कितना छोटा है। आपके सीपीयू में ट्रांजिस्टर जितना ज्यादा छोटा होगा, आपका सीपीयू उतना ही ज्यादा फास्ट कार्य करेगा, और जो आपके मन के अंदर जो गीगाहर्टज वाला कंफ्यूजन है, कि dual-core में गीगाहर्टज ज्यादा है, और कोर I5 में गीगाहर्टज कम है। तो आखिर कोर I5 इतना फास्ट क्यों है, और ज्यादा अच्छा क्यों है। उस चीज के बारे में मैं आपको डिटेल से बताता हूं।

dual-core से core i5 इतना फास्ट क्यों है?


एक छोटा सा उदाहरण आपको बताता हूं। कि जैसे डुएल कोर सीपीयू है, उसके अंदर मान लीजिए 2 गीगाहर्टज है। इसका मतलब यह हुआ कि डुएल कोर सीपीयू किसी काम को करने में 200 करोड़ बार बंद चालू होता है। पर कोर I5 सीपीयू उसी काम को करने में 100 करोड़ बाहर ही बंद चालू होता है। मतलब के कोर I5 सीपीयू बहुत ही कम बार बंद चालू होकर वह काम कर लेता है, जिस काम को करने में डुएल कोर सीपीयू 200 करोड़ बार बंद चालू होता है।

इस बात से आप यह कंफर्म कर सकते हैं, की आपके लिए कौन सा CPU  बेस्ट है, और एक बात आपको बता दूं, कि जितने कम बार हमारा सीपीयू बंद चालू होकर उस काम को कर लेगा। उतना ही कम बिजली हमारे कंप्यूटर को चलने में लगेगी। मतलब कि हमारा कंप्यूटर कम बिजली की खपत करेगा, और इससे आपकी बिजली भी बचेगी।


सारांश :-


दोस्तों अगर मैं शॉर्ट में आपको बताऊं तो, हमारे कंप्यूटर का सीपीयू जो होता है, उसके अंदर जो हर्ट्ज लिखा हुआ होता है। उसका मतलब यह होता है कि हमारा सीपीओ एक सेकेंड के अंदर कितनी बार बंद-चालू होता है। और एक बार बंद और चालू होने को हम 1 साईकिल कहते है, और एक साईकिल को हम 1 हर्ट्ज कहते है।

तो दोस्तों आपको हमारा यह पोस्ट कैसा लगा। हमें कमेंट करके जरूर बताइए, और साथ ही साथ अगर आपको कोई सवाल पूछना है, तो आप हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट करके पूछ सकते हैं। तो चलिए चलते हैं, और फिर मिलेंगे नेक्स्ट पोस्ट पर।
एक साईकल 

Wednesday, September 4, 2019

10:10 PM

कोर (Core) क्या है? ( what is core )

आज के इस पोस्ट में हम कोर (Core) के बारे में जानेंगे, कि आखिर यह कोर (Core) होता क्या है। यह किस बला का नाम है। दोस्तों आप जब भी कोई कंप्यूटर खरीदने जाते हैं, या लैपटॉप खरीदने जाते हैं, तो आपने देखा होगा कि शॉप ओनर आपको यह बोलता है, कि आपको कौन सा लैपटॉप चाहिए। कोर I5 चाहिए कोर i7 चाहिए, कोर I3 चाहिए, dual-core चाहिए, क्वाड कोर  चाहिए, या कौन सा चाहिए। आपको कई सारे ऑप्शन दे देता है। आप कंफ्यूज हो जाते हैं, कि मैं आखिर कौन सा लूं। आखिर यह कौर क्या चीज है। तो आज के इस पोस्ट में हम यह जानेंगे, कि आखिर यह कोर क्या होता क्या है। तो चलिए बिना वक्त शुरू कर लेते हैं, और दोस्तों अगर आपने हमारा इसके पहले वाला पोस्ट सीपीयू के बारे में नहीं पढ़ा है, तो आप प्लीज सीपीयू के उस पोस्ट को पढ़ ले।
old links :- 
कंप्यूटर के सभी भाग (computer all parts) class 4
कंप्यूटर का वर्गीकरण ( कंप्यूटर के प्रकार) - Classification of computers (types of computers) class 3

कोर (Core) क्या है?

कोर क्या है ? ( what is core )
कोर क्या है ? ( what is core )

दोस्तों अगर आपको पता नहीं है, कि कोर क्या है, तो उसके लिए पहले आपको सीपीयू को समझना पड़ेगा। कि सीपीयू आखिर किस तरह का बना होता है।
अगर आप एक इलेक्ट्रिशियन है, तो आपको पता ही होगा, कि हमारे कंप्यूटर के मदरबोर्ड में, या किसी भी इलेक्ट्रॉनिक मदरबोर्ड में आपको ट्रांसिस्टर मिल जाएगा। ट्रांजिस्टर असल में तीन टांग का होता है। जिसका फोटो आपको गूगल में मिल जाएगा, और हो सकता है, मैं इस पोस्ट में आपको दिखा भी दूं। एक सीपीयू के अंदर लाखों की संख्या में ट्रांजिस्टर हो सकते हैं, और यह ट्रांजिस्टर जितने छोटे होते जाते हैं, और एक सीपीयू के अंदर ट्रांजिस्टर की मात्रा जितनी बढ़ती रहती है। उतना ही हमारे सीपीयू का जनरेशन बदलता रहता है। सीधे शब्दों में अगर मैं आपको कहूं तो, ट्रांजिस्टर का छोटा होना ही जनरेशन कहलाता है। अब हम समझते हैं, कोर को।
दोस्तों हम कोर (Core) को समझने के लिए किसी भी टेक्निकल चीज का सहारा नहीं लेंगे। हम उदाहरण के तौर पर कोर को समझेंगे, कि आखिर कोर होता क्या है। ताकि जो टेक्निकल बंदे नहीं है, जो टेक्नोलॉजी से जुड़े नहीं है, उनको भी बड़ी आसानी से समझ में आ सके कि आखिर यह कोर होता क्या है। दोस्तों जनरली कोर कई तरह के होते हैं, जो निम्न है :-

कोर (Core) के प्रकार


सिंगल कोर (single core)
dual-core (dual-core)
क्वॉड कोर (Quad core)
Xeon quad core
ऑक्टा कोर (Octa core)
डेका कोर (Deca Core)
कोर I3 (Core i3)
कोर I5 (Core i5)
कोर i7 (Core i7)

सामान्य तौर पर यह कौर के प्रकार होते हैं, तो अब हम इन सब को एक-एक करके समझेंगे, कि यह आखिर होता क्या है।

सिंगल कोर (single core)


दोस्तों आपने कभी ना कभी यह सुना होगा, कि आपका कंप्यूटर P4 है या P3 है, ऐसा कभी ना कभी सुना होगा। पर दोस्तों आखिर यह P होता क्या है। दोस्तों P का मतलब होता है, पेंटीअम (Pentium), और जो भी यह पेंटीअम सीरीज के सीपीयू है, इनमें सिंगल कोर का उपयोग किया जाता था। अर्थात यह सिंगल कोर के होते थे। इन सीपीयू वाले कंप्यूटर में आप एक वक्त में एक ही काम कर सकते थे। अगर आप को एक साथ दो या तीन काम करना होता, तो आप नहीं कर पाते और आपका कंप्यूटर हैंग होने लग जाता। वह इसलिए होता दोस्तों, क्योंकि आपका कंप्यूटर एक वक्त में एक काम करने के लिए ही बना है। अर्थात आपका सीपीयू एक का वक्त में एक काम करने के लिए ही बना है। उसमें आप मल्टीपल कार्य नहीं कर सकते। इस चीज को हम सिंगल कोर कहते हैं।आपको इसका एक उदाहरण देता हूं।
सिंगल कोर (single core)
सिंगल कोर (single core)

मान लीजिए आप अपने कंप्यूटर में कोई डॉक्यूमेंट बना रहे हैं, अब आप उस डॉक्यूमेंट को लिखते-लिखते अचानक इंटरनेट चलाने लग गए हैं, या कोई फाइल किसी पेनड्राइव से अपने कंप्यूटर में कॉपी कर रहे हैं। तब अचानक आपका कंप्यूटर हैंग हो जाता है। वह आपका कंप्यूटर हैंग इसलिए होता है, क्योंकि आपका सीपीयू सिर्फ उस डॉक्यूमेंट को लिखने के कार्य को ही करने के योग्य है, आप एक साथ दो कार्य नहीं कर सकते हैं, इसीलिए P4 सीपीयू P3 सीपीयू काफी स्लो हो जाते थे। जब हम इसमें मल्टीपल कार्य करते थे। कुल मिलाकर कहा जाए तो सिंगल कोर का अर्थ है, एक समय में एक कार्य करना।

डुएल कोर (dual core)


दोस्तों डुएल कोर आते ही पेंटीअम सीरीज खत्म हो जाती है, और उसके बाद dual-core आ जाता है। डुएल कोर में आप एक वक्त में दो कार्य कर सकते हैं, अर्थात दो तरह की फाइल एक साथ बना सकते हैं। इसके लिए आपको एक उदाहरण देता हूं।
डुएल कोर (dual core)
डुएल कोर (dual core)

मान लीजिए आप कोई डॉक्यूमेंट बना रहे हैं, साथ ही साथ आप फोटोशॉप का भी काम करना चाहते हैं, फोटो एडिट करना चाहते हैं। तो आप डुएल कोर सीपीयू के साथ उस कार्य को बहुत ही आसानी से कर सकते हैं, और अगर आप उसमें एक साथ तीन या चार काम एक साथ करने लग गए, तो आपका कंप्यूटर हैंग हो जाएगा। तो आप अब तक समझ ही गए होंगे, कि dual-core में एक वक्त में दो काम एक साथ कर सकते हैं। पर इससे ज्यादा हम नहीं कर सकते अगर करेंगे तो आपका कंप्यूटर हैंग हो जाएगा।

क्वॉड कोर (Quad core)

क्वॉड कोर (Quad core)
क्वॉड कोर (Quad core)

दोस्तों क्वॉड कोर dual-core का डबल होता है। इसका मतलब कि इसमें एक साथ हम चार काम कर सकते हैं। जिस प्रकार dual-core में हम दो ही कार्य कर सकते थे, उसी प्रकार क्वॉड कोर में हम चार कार्य एक साथ कर सकते हैं, और 4 से ज्यादा किया तो आपका कंप्यूटर हैंग होने लग जाएगा, और स्लो चलने लग जाएगा।
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Xeon quad core

Xeon quad core
Xeon quad core

दोस्तों Xeon quad core में आप एक साथ 6 कार्य कर सकते हैं, मतलब 6 आदमी के कार्य करने की क्षमता होती है, इसमें। यह काफी तेजी से कार्य करता है। आप जो कार्य  सिंगल कोर में अर्थात P4 में या पी 3 मैं, 6 मिनट में करते थे, वह कार्य एक्शन क्वॉड कोर में 1 मिनट में ही हो जाएगा, क्योंकि इसमें 6 कार्य एक साथ करने की क्षमता होती है।

ऑक्टा कोर (Octa core)

ऑक्टा कोर (Octa core)
ऑक्टा कोर (Octa core)

दोस्तों ऑक्टाकोर में आप एक साथ 8 कार्य कर सकते हैं, अर्थात यह बाकी सब से काफी ज्यादा पावरफुल है। और काफी तेजी से कार्य करता है। इसकी प्रोसेसिंग क्षमता बहुत ही ज्यादा होती है, 8 लोगों के बराबर एक अकेला कार्य कर लेता है, और शार्ट में इसको कहो तो, यह 8 मिनट का कार्य 1 मिनट में ही कर देता है।

डेका कोर (Deca Core)


डेका कोर (Deca Core)
डेका कोर (Deca Core)

दोस्तों डेका कोर में आप 10 मिनट का काम 1 मिनट में कर सकते हैं, अर्थात इसमें 10 कोर होते हैं, जिसकी मदद से आप 10 कार्य एक साथ कर सकते हैं।  और 10 मिनट का काम 1 मिनट में ही खत्म कर सकते हैं। यह बहुत ही ज्यादा फास्ट होता है, और यह काफी ज्यादा महंगा आता है।

कोर I3 (Core i3)

कोर I3 (Core i3)
कोर I3 (Core i3)

दोस्तों कोर I3 असल में dual-core होता है, पर इसमें आपको हाइपरथ्रेडिंग इनेबल्ड मिल जाती है, और यह 2 वर्जन में आता है, कोर I3 एक cpu  डुएल कोर आता है, और दूसरा क्वॉड कोर आता है।

दोस्तों अब आप कहेंगे कि अगर कोर I3 dual-core आता है, और दूसरा क्वॉड  में आता है, तो हमें कोर I3 लेने की क्या जरूरत हम डायरेक्ट डुएल कोर सीपीयू ले सकते हैं, या क्वॉड कोर सीपीयू ले सकते हैं। पर दोस्तों इन में फर्क मैं आपको बता देता हूं। कि जिस प्रकार ट्रांजिस्टर छोटे होते गए उसी प्रकार जनरेशन भी बदलती गई और कोर I3 में कंपनी ने इतना छोटा ट्रांजिस्टर बना लिया है, जिसकी वजह से यह नॉर्मल डुअल कोर के मुकाबले काफी तेजी से कार्य करता है, और दोस्तों इसमें आपको हाइपरथ्रेडिंग मिल जाती है। इसमें एक और बात समझने के लिए आपके है, कि अगर आप कोर I3 डुएल कोर सीपीयू लेते हैं, तो आप उसमें यह देख ले कि उसमें हाइपरथ्रेडिंग इनेबल्ड है, या डिसएबल। अगर उसमें हाइपरथ्रेडिंग इनेबल्ड है, तो आपका सीपीयू उसको क्वॉड कोर में समझने लगता है, अर्थात यह 4 कोर का बन जाता है। डुएल कोर में 2 कोर आते हैं, और क्वॉड कोर बनने के बाद यह 4 कोर का हो जाता है, और यह सामान्य गतिविधि से काफी तेजी से कार्य करता है, और यह पूरा हाइपरथ्रेडिंग के द्वारा ही होता है।
Hyper-threading की वजह से ही dual-core क्वॉड कोर बन जाता है, यह बात आप ध्यान में रखें।

कोर I5 (Core i5)

कोर I5 (Core i5)
कोर I5 (Core i5)

कोर I5 में कोर I3 की ही तरह dual-core और क्वॉड कोर मिलता है, इसमें अगर आप लैपटॉप खरीद रहे हैं, तो इसमें आपको hyper-threading मिलता है, जिसकी वजह से dual-core क्वॉड कोर में बदल जाता है, और आपका सीपीयू उसे 2 कोर के बजाज 4 कोर में समझने लगता है, और अगर आप डेक्सटॉप खरीदते हैं, तो वह पहले से ही क्वॉड कोर में ही आता है, इसमें हाइपरथ्रेडिंग नहीं होता है, और यही वजह है, कि लैपटॉप और डेक्सटॉप दोनों एक ही स्पीड से कार्य करते हैं।

कोर i7 (Core i7)

कोर i7 (Core i7)
कोर i7 ( Core i7 )

दोस्तों कोर i7 में, सभी सीपीयू के मुकाबले थोड़ा सा अलग हो जाता है। इसमें आपको लैपटॉप में अलग बात  देखने को मिलेगा और डेक्सटॉप में अलग बात।  दोस्तों अगर आप लैपटॉप खरीदते हैं, तो यह डुअल कोर और क्वॉड कोर में आता है, और दोस्तों इसमें आपको हाइपरथ्रेडिंग मिल जाता है। अगर आपका लैपटॉप कोर i7 है, और उसमें डुएल कोर सीपीयू है, और अगर हाइपरथ्रेडिंग उसमें इनेबल्ड होता है तो वह क्वॉड कोर में बदल जाता है।
और अगर आप डेक्सटॉप लेते हैं, अगर उसमें हाइपरथ्रेडिंग आपको इनेबल्ड मिलता है, तो वही क्वॉड कोर आपका ऑक्टा कोर में बदल जाता है। जो कि काफी ज्यादा फास्ट होता है, और यह सीपीयू काफी ज्यादा महंगा आता है। लैपटॉप के मुकाबले कोर i7 में डेक्सटॉप ज्यादा महंगा आता है।

कौन सा CPU हमारे लिए सही है :-


दोस्तों आप सोच रहे होंगे कि, मैंने इतने सारे कोर और सीपीयू के बारे में बताया है, तो आप अब तक कंफ्यूज हो गए होंगे कि आपको कौन सा सीपीओ लेना उचित है। दोस्तों अगर आप सिंपल कार्य करना चाहते हैं, जैसे कि नॉर्मल माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस और और मूवीस वगैरह देखना चाहते हैं, तो उसके लिए आपका डुएल कोर सीपीयू ही बहुत अच्छा है, और इसमें आप कोर I3 भी ले सकते हैं। कोर I3 लेने से आप अच्छी तरह से इंटरनेट चला सकते हैं साथ ही साथ आप छोटे-मोटे कार्य भी कर सकते हैं, और छोटे-मोटे गेम भी आप खेल सकते हैं। पर यही आपको अगर कोई बड़ा सॉफ्टवेयर चलना है, जैसे कि आपको फोटोशॉप में हाई ग्राफिक का काम करना है, या आपको वीडियो एडिटिंग का काम करना है, या आपके ग्राफिक की बहुत ज्यादा रिक्वायरमेंट रहती है। और आप गेम खेलना चाहते हैं, वह भी हाई डेफिनेशन में। तो आप I5 सीपीयू परचेज करें। जिससे कि आप अपने कंप्यूटर में हाई ग्राफिक के गेम खेल सकते हैं। और बहुत ही आसानी से आपका हर कार्य कर सकते हैं, और अगर आपको नॉर्मल सॉफ्टवेयर चलाना है, तो प्लीज आप I5 में पैसा इन्वेस्ट ना करें। आपके लिए I3 बेस्ट है, और अगर आप बहुत ही ज्यादा हाई ग्राफिक का काम करते हैं, जैसे कि आप प्रोग्रामिंग करते हैं या बहुत ही ज्यादा हाई लेवल के ग्राफिक डिजाइन करते हैं, तो आपके लिए i7 बेस्ट है, और आप i7 में पूरी स्पीड के साथ कार्य कर सकते हैं। आपका कंप्यूटर कभी हैंग नहीं होगा, और ना ही आपको कोई दिक्कत आने वाली है। आपके घंटों का काम मिनटों में हो जाएगा। तो अगर आपको ज्यादा स्पीड चाहिए और आपका काम कहीं भी रुकना नहीं चाहिए। तो आप कोर i7 ले लीजिए आपके लिए बेस्ट रहेगा।
तो अब तक आप को यह समझ में आ गया होगा के, आपको कौन सा सीपीयू लेना है। और आपके लिए कौन सा सीपीयू बेस्ट है।

नोट (Note ) :-


दोस्तों हमारे आज के इस पोस्ट में हमने आपको सीपीयू के बारे में एक अलग अंदाज में समझाने की कोशिश की है। मुझे आशा है, कि आप को सीपीयू के बारे में पता चल गया होगा, कि सीपीयू क्या होता है, और इसमें कोर क्या होता है।
अगर आपको हमारा यह पोस्ट पसंद आया हो तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं। साथी साथ आपको कुछ और भी जानना हो तो आप हमें कमेंट करके बता सकते हैं। हम आपके प्रॉब्लम का सलूशन देने की पूरी तरह से कोशिश करेंगे।

Tuesday, September 3, 2019

10:57 PM

सीपीयू (CPU) के अंदर क्या होता है? (What happens inside the CPU?)

सीपीयू (CPU) की कम्पनी 

दोस्तों सीपीयू (CPU) मुख्य रूप से तीन ही कंपनी बनाती है, और सीपीयू (CPU) तीन ही प्रकार का पाया जाता है। यह तीन कंपनियां निम्न है :-
(1) इंटेल ( Intel )
(2) एमडी ( AMD )
(3) मोटरोला ( Motorola )

दोस्तों सबसे सस्ता सीपीयू जो होता है, वह एमडी का सीपीयू होता है।
एमडी से महंगा सीपीयू इंटेल का होता है।
और दुनिया का सबसे महंगा सीपीयू मोटरोला कंपनी बनाती है, जो कि सुपर कंप्यूटर में लगा होता है।

 पर दोस्तों सामान्य तौर पर हम इंटेल और एमडी का ही सीपीयू यूज कर सकते हैं, क्योंकि यह आम लोगों के लिए ही बना है, और इंटेल ही वह कंपनी है, जो कि सबसे सस्ता सीपीयू पहली बार आम लोगों के लिए लेकर आई।
यह तीन कंपनियां ही है, जो सीपीयू बनाती है।

दोस्तों अब आप कहेंगे कि अगर आप दुकान में या किसी शॉप में पीसी बनाने जाते हैं, अर्थात पीसी खरीदने जाते हैं, या लैपटॉप खरीदने जाते हैं। तो आपको कई बार एक सवाल पूछा जाता है, कि आपको कौन सा लैपटॉप लेना है। कोर I5 ( Core i5 ) लेना है कोर I3 ( Core i3 ) लेना है, कोर i7 ( Core i7 ) लेना है। डुअल कोर (Duel Core) लेना है, कोर 2 ड्यू ( Core2Due ) लेना है। ऐसे कई सारे ऑप्शन देते हैं, शॉप वाले।

पर दोस्तों मैं आपको बता दूं, कि यह सीपीयू के प्रकार नहीं है। यह सीपीयू के एक तरह से वर्जन है। और यह जितने भी कोर में सीपीयू के नाम आते हैं, यह सभी इंटेल कंपनी बनाती है।

दोस्तों अगर आपको कोई पीसी बनवाना है, या खरीदना है, या कोई लैपटॉप खरीदना है। तो उसको किस प्रकार से जस्टिफाई करें, की कौन सा सीपीयु ले। इसके बारे में मैं नीचे बता दूंगा आपको। पर पहले इसके बेसिक जान लेते हैं।

सीपीयू (CPU) के अंदर क्या होता है?

What happens inside the CPU
What happens inside the CPU

 दोस्तों क्या आपको पता है, कि सीपीयू के अंदर क्या होता है। पता नहीं होगा। क्योंकि यह बहुत ही कम लोग जानते हैं, जो अच्छे टेक्निशियंस है, उनको ही पता है, कि सीपीयू के अंदर क्या होता है। दोस्तों आमतौर पर लोग कहते हैं, कि सीपीयू की स्पीड बहुत ज्यादा हो तो बहुत तेजी से काम करता है। पर कई लोगों को यह पता नहीं होता, कि सीपीयू आखिर तेजी से किस प्रकार से काम करता है, और आजकल सीपीयू में जनरेशन आने लगे हैं, तो आखिर यह जनरेशन क्या है? इन सभी चीजों के बारे में हम आज के इस पोस्ट में पढ़ने जा रहे।

दोस्तों आपने डायोड नाम तो कहीं ना कहीं सुना होगा। अगर आप इलेक्ट्रीशियन है, तो आपको पता होगा कि डायोड क्या होता है। दोस्तों आपको शॉर्ट में बता देता हूं, कि डायोड एक इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेंट होता है, जो कि हमारे कंप्यूटर के मदरबोर्ड में भी लगा होता है, और जितने भी इलेक्ट्रॉनिक आइटम है, उन सभी में लगा होता है, और दो डायोड मिलकर एक ट्रांजिस्टर बनता है, और कई सारे ट्रांजिस्टर मिलकर एक IC  बनती है।

तो दोस्तों आपको पता चल गया होगा, कि आई सी क्या होती है, पर दोस्तों मैं आपको बता दूं, की हमारा जो सीपीयू होता है, यह भी एक तरह का आईसी होता है। इनमें 12 या 1000  नहीं इनमें हजारों लाखों ट्रांजिस्टर एक साथ फिट रहते हैं, और एक सीपीओ में जितने ज्यादा ट्रांजिस्टर होते है, सीपीयु उतना ही तेज कार्य करता है। पर इसमें एक और बात है, सीपीयू के अंदर एक कैश मेमोरी लगा होता है, जिसकी क्षमता जितनी ज्यादा होगी उतना ही तेजी से हमारा सीपीयू वर्क करता है।

आप कभी किसी सीपीयू को तोड़ कर देखिए। अंदर आपको एक आई सी टाइप का एक चिप मिलेगा उस चिप को कैश मेमोरी कहा जाता है। आप गूगल पर भी सर्च करके देख सकते हैं, अब बात करते हैं, कि सीपीयू में जनरेशन क्या है।

सीपीयू में जनरेशन क्या है?


दोस्तों जैसा कि मैंने ऊपर बताया है, कि सीपीयू के अंदर जितने ज्यादा ट्रांजिस्टर लगेंगे, उसकी कार्य करने की क्षमता तथा उसका पावर उतना ही  ज्यादा होगा, और ट्रांजिस्टर जितना छोटा होगा वह उतनी ही तेजी से कार्य करेगा। तो जिस प्रकार ट्रांजिस्टर छोटे होते जाते हैं, जनरेशन भी बदलते रहते हैं। अगर यह बात आपको शार्ट में बताऊ, तो ट्रांजिस्टर का छोटा होना ही जनरेशन कहलाता है। मान लीजिए कि 1 साल पहले 1 सीपीयू में एक लाख ट्रांजिस्टर लगे हुए हैं, और 1 साल बाद उसी सीपीयू के अंदर 120000 ट्रांजिस्टर फिट हो गए हैं, तो हमारे सीपीयू के साइज तो उतनी ही रहेगी, पर ट्रांजिस्टर और छोटे कर दिए गए। जिससे कि एक लाख के जगह 120000 ट्रांजिस्टर उसमें फिट हो गए, तो इस का मतलब जनरेशन बदल गया हैं। ट्रांजिस्टर का शार्ट छोटा होना ही जनरेशन कहलाता है।
तो दोस्तों अब तक आपको पता चल ही गया होगा किसी भी सीपीयू में जनरेशन क्या होता है।

अब कुछ सीपीयू के नाम लाइन से जान लेते हैं :-



  1. P1 CPU  
  2. P2 CPU 
  3. P3 CPU 
  4. P4 CPU 
  5. Duel Core CPU  
  6. Quad Core CPU 
  7. exion Quad Core CPU 
  8. Octa core CPU 
  9. Deca Core CPU 
  10. Core I3 CPU 
  11. Core I5 CPU 
  12. Core i7 CPU 


दोस्तों यह सभी सीपीयू इंटेल कंपनी बनाती है, और एमडी में FX  और ryzen होते हैं। जिस तरह से इंटेल में कोर चलता है उसी प्रकार एमडी में FX  और ryzen  होते हैं।

आप ने क्या सीखा :-

दोस्तों आज का ही पोस्ट इतना ही था। आज के इस पोस्ट में मैंने कोई भी किताबी भाषा का उपयोग नहीं किया है। मैंने अपने हिसाब से सही से बताया है, कि एक सीपीयू क्या होता है। और वह किस प्रकार से बना होता है, और किन चीजों से बना होता है। अगर मैं आपको किताबी भाषा समझाता हूं, तो आप को अब तक कुछ भी समझ में नहीं आता। इसीलिए ही मैंने आपको अपने हिसाब से सीपीयू को समझाने की कोशिश की है। अगर आपको हमारा यह पोस्ट पसंद आया है, तो प्लीज हमें कमेंट में जरूर बताइए और अगर मुझसे कोई गलती हुई है, तो प्लीज हमें कमेंट में जरूर बताइए। ताकि मैं उस चीज में सुधार कर सकूं। आज सीपीयू के ऊपर में एक और पोस्ट लिखने वाला हूं। तो अब आपसे विदा लेता हूं, और फिर मिलेंगे नेक्स्ट पोस्ट में। 

Monday, September 2, 2019

10:14 PM

Computer all parts short review (कंपयूटर के सभी भागों का संक्षिप्त विवरण)

Computer all parts short review
कंपयूटर के सभी भागों का संक्षिप्त विवरण

दोस्तों हमारे पिछले पोस्ट में हमने आपको बताया था, कि कंप्यूटर के कितने प्रकार के भाग होते हैं, उनके कितने प्रकार के पार्ट्स होते है। कितने प्रकार के उसमें उपकरण जुड़े होते हैं, और आज के इस पोस्ट में हम उन सभी उपकरणों को एक-एक करके संक्षिप्त में जानेंगे, कि वह क्या कार्य करते हैं, और कंप्यूटर में उनकी भूमिका क्या है। तो आइए बिना वक़्त गवाए, हम आज का यह पोस्ट शुरू करते हैं, और दोस्तों अगर आपने अब तक हमारा पिछला पोस्ट नहीं पड़ा है, तो हमारा पिछला पोस्ट जरूर पढ़ें जिसका लिंक आपको दे दिया जाएगा तो चलिए आज के टॉपिक शुरू करते हैं।

मदरबोर्ड (Motherboard)

motherboard
motherboard

दोस्तों मदरबोर्ड कंप्यूटर का सबसे महत्वपूर्ण भाग होता है। कंप्यूटर में जो भी उपकरण होते हैं, वह सभी उपकरण मदरबोर्ड से ही कनेक्ट होते हैं, चाहे वह डीवीडी राइटर हो, सीडी राइटर हो, कैबिनेट हो, एस. एम. पी. एस.(S.M.P.S.) हो, या स्पीकर। कोई भी चीज हो ए टू जेड। सभी चीजें इसी से ही कनेक्ट होती है। यही वह उकरण है, जो कि कंप्यूटर में लगे सभी कंपोनेंट को चलाने का कार्य करता है, और उन सब में तालमेल बनाकर निर्देशों को प्रवाहित करता है।

एक मदरबोर्ड आकार और प्रकार के अनुसार कई प्रकार के हो सकते हैं। लेकिन इनमें कुछ कॉम्पोनेन्ट सभी मदरबोर्ड पर एक जैसे होते हैं। मदरबोर्ड के बिना हमारा कंप्यूटर कोई काम का नहीं है। यही सबसे महत्वपूर्ण भाग होता है। दोस्तों मदर बोर्ड के ऊपर में एक अलग से पोस्ट लिख दूंगा। जिसमें कि आपको मदरबोर्ड में लगी हुई हर एक चीज के बारे में पता चल जाएगा।

सी.पी.यू (CPU) Central Processing Unit

cpu
cpu

दोस्तों आमतौर पर लोग कैबिनेट को सीपीयू करते हैं, पर यह बिल्कुल ही गलत है। एक्चुअली सीपीयू कंप्यूटर का दिमाग होता है। जिसका दूसरा नाम प्रोसेसर (Processor) भी होता है। ज्यादातर लोग सीपीयू को प्रोसेसर के नाम से भी जानते हैं। यही वह डिवाइस होता है, जो कंप्यूटर के सभी प्रोग्राम को प्रोसेस करता है, और उनको चलाता है। प्रोसेसर कई प्रकार के पाए जाते जिसके लिए अलग से पोस्ट लिख दिया जाएगा। जो आप आगे पड़ेंगे।
इतना जान लीजिए कि यह कंप्यूटर का एक दिमाग होता है, जो कि सभी चीजों को कंट्रोल करने का कार्य करता है।

मॉनिटर (monitor)

monitor
monitor

दोस्तों मॉनिटर को विजुअल डिस्प्ले यूनिट कहा जाता है। जिसे एक केबल द्वारा मुख्य मशीन से जोड़ा जाता है।
दोस्तों हम कंप्यूटर में जो भी कार्य करते हैं, वह सब कुछ हमें मॉनिटर पर ही दिखाई देता है, और मॉनिटर को कुछ लोग डिस्प्ले भी बोलते हैं। कुछ लोग स्क्रीन बोलते हैं। यह कई प्रकार के पाए जाते हैं। जिसके बारे में मैं अलग से पोस्ट लिख दूंगा। जिसके बारे में आप आगे की पोस्ट में पड़ेंगे।

रैम (RAM) Random Access Memory

ram
ram

दोस्तों आमतौर पर रैम के बारे में लोग यह जानते है, कि यह कंप्यूटर की स्पीड बढ़ाता है। पर यह बिल्कुल ही गलत है। क्योंकि कंप्यूटर की स्पीड रैम के ऊपर निर्भर नहीं करती है। वह कंप्यूटर के सीपीयू के ऊपर निर्भर करता है, और सीपीयू के अंदर लगे हुए कैश मेमोरी के ऊपर निर्भर करता है। कि कैश मेमोरी कितनी ज्यादा है। रैम तो बस एक टेंपरेरी मेमोरी होती है।  रैम में information और data तब तक मौजूद रहता है, जब तक कंप्यूटर चल रहा है। हम कंप्यूटर में जो भी कार्य करते हैं, वह सभी इसी के अंदर  रहता है, और जब हम किसी भी डॉक्यूमेंट को सेव करते हैं, तो वह रैम से होकर हमारे कंप्यूटर के हार्ड डिक्स में सेव हो जाता है। जिसे HDD भी कहा जाता है।
दोस्तों  रैम  का फुल फॉर्म रेंडम एक्सेस मेमोरी होता है।
कंप्यूटर सिस्टम की व इकाई जो सूचनाओं को स्थाई अस्थाई रूप से संचित करने का कार्य करें उन्हें रैम का जाता है।

हार्ड डिक्स ड्राइव  (HDD) hard disk drive 

hard disk drive
hard disk drive

 दोस्तों हम कंप्यूटर में जो भी कार्य करते हैं, जो कुछ भी सेव करते हैं। चाहे वह गाना हो, वीडियो हो, कोई डॉक्यूमेंट हो, या कुछ भी हो। ए टू जेड। हम जो भी सेव करते हैं, वह सभी हार्ड डिक्स में ही सेव होते हैं। जिस प्रकार आपके मोबाइल में मेमोरी कार्ड होता है, जिसमें आप गाने सेव करते हैं। उसी प्रकार हमारे कंप्यूटर में हार्ड डिक्स होता है। जिसमें हम हमारे सभी डॉक्यूमेंट और गाने सब कुछ सेव करते हैं।

Floppy Disk Drive (FDD) फ्लॉपी डिस्क ड्राइव

floppy disk drive
floppy disk drive

दोस्तों आज के जमाने में पेनड्राइव को कौन नहीं जानता। आप पेनड्राइव से काफी सारे कार्य कर सकते हैं। पेनड्राइव में आप किसी भी तरह का गाना, वीडियो, ऑडियो, मूवीस वगैरह सब कुछ लोड कर सकते हैं। तथा एक पेन ड्राइव में सेव कर के दूसरे कंप्यूटर में भी सेव कर सकते हैं। उसी प्रकार फ्लॉपी डिस्क पहले के जमाने में यूज में लिया जाता था।
यह ठीक पेनड्राइव की तरह ही काम में आता था। जिस प्रकार आप पेनड्राइव में किसी भी गाने डॉक्यूमेंट और फिल्मों को सेव कर सकते हैं। उसी प्रकार आप फ्लॉपी डिस्क में भी सेव कर सकते थे, और जिस प्रकार आज के जमाने में विंडो चढ़ाने के लिए पेनड्राइव का उपयोग किया जाता है। सीडी ड्राइव का उपयोग किया जाता है। उसी प्रकार पहले के जमाने में फ्लॉपी डिस्क ड्राइव का उपयोग किया जाता था। पर जब से पेनड्राइव आ गया और डीवीडी राइटर आ गया, तब से फ्लॉपी डिस्क का उपयोग बिल्कुल ही खत्म हो गया है।

CD writer

CD writer
CD writer

 दोस्तों आपने कभी ना कभी सीडी प्लेयर देखा होगा। जिसमें कि आप गाने सुन सकते थे, और मूवीस देख सकते थे। उसी प्रकार हमारे कंप्यूटर में भी सीडी राइटर आता है। जिसके अंदर आप सीडी डालकर अपने कंप्यूटर में किसी भी डाटा को ट्रांसफर कर सकते थे, या विंडो चढ़ा सकते थे। सीडी राइटर का उपयोग आज के जमाने में नहीं किया जाता। क्योंकि आज के जमाने में सीडी राइटर मिलता ही नहीं है, यह सिर्फ आपके नॉलेज के लिए था। इसलिए आपको बता दिया गया है।

DVD writer

DVD writer
DVD writer

दोस्तों आज के जमाने में हम अपने टीवी में गाने सुनने तथा मूवीस देखने के लिए, जो डीवीडी प्लेयर को यूज में लेते हैं, उसी प्रकार हमारे कंप्यूटर में भी डीवीडी राइटर आता है। वह एक तरह से प्लेयर ही है, पर इसमें आप सीडी को रीड भी कर सकते हैं, और राइट भी कर सकते हैं। मेरा मतलब के आप सी डी में गाना वगैरह सुन भी सकते हैं, और उसको अपने हार्ड डिक्स में सेव भी कर सकते हैं। और साथ ही साथ अपने हार्ड डिक्स की जो भी चीज है, जो भी आप सेव करना चाहे, वह आप अपनी डीवीडी राइटर के जरिए डीवीडी में सेव कर सकते हैं। इसीलिए डीवीडी राइटर आज के जमाने में सबसे ज्यादा प्रचलित है।

कैबिनेट (Cabinet)

कैबिनेट (Cabinet)
कैबिनेट (Cabinet)

दोस्तों कैबिनेट कंप्यूटर का वह भाग है, जिसमें कि कंप्यूटर के सभी एसेसरीज उसके अंदर ही इंस्टॉल होती है। मेरा मतलब कि कंप्यूटर के जितने भी कॉम्पोनेंट है, चाहे वह मदरबोर्ड हो, कीबोर्ड, माउस हो, एस.एम.पी.एस हो। वह सभी इसी कैबिनेट से कनेक्ट होते हैं, और इसी के अंदर ही सभी फिट किए जाते हैं। यह कंप्यूटर का बाहरी ढांचा ( आवरण ) होता है।

SMPS

SMPS
SMPS

दोस्तों एसएमपीएस कंप्यूटर की पावर सप्लाई होती है। जिससे कि कंप्यूटर को पावर मिलती है, और इसी एस.एम.पी.एस के जरिए ही कंप्यूटर के हर एक पार्ट को बिजली मिलती है।

स्पीकर (Speaker)

speaker
speaker

दोस्तों आप कंप्यूटर में जो भी कार्य करते हैं, चाहे वह गाना सुन रहे हो, या मूवीस देख रहे हो, तो इसमें जो आवाज आती है, कंप्यूटर से। वह आवाज स्पीकर से ही आती है।
दोस्तों कैबिनेट को आमतौर पर लोग सीपीयू करते हैं, पर यह बिल्कुल ही गलत है।
सीपीयू के बारे में आपको ऊपर बता दिया गया है।

Mouse

Mouse
Mouse

दोस्तों माउस एक करसर कंट्रोलिंग तथा पॉइंटिंग उपकरण है, अर्थात माउस द्वारा कंप्यूटर स्क्रीन पर कंट्रोल को नियंत्रित किया जाता है। आपने देखा होगा जब आप कंप्यूटर में प्वाइंटर को इधर-उधर करते हैं, तो वह जिस उपकरण से नियंत्रित होता है, उसी उपकरण को हम माउस कहते हैं। माउस कर्सर को इधर उधर हीलाने तथा उस को निर्देश देने के कार्य करता है।

प्रिंटर (printer)

प्रिंटर (printer)
प्रिंटर (printer)

दोस्तों प्रिंटर का उपयोग हम तब करते हैं, जब हमें कंप्यूटर से किसी चीज को बाहर आउटपुट में लेना होता है। मान लीजिए आपका कोई डॉक्यूमेंट है। उसको अगर आपको फिजिकल तौर पर चाहिए, तो आप उसका प्रिंट निकालते हैं, अर्थात उसका छवि एक कागज पर प्रिंट करते हैं। तो जिस मशीन के द्वारा आप उसके फोटो को एक पेपर पर प्रिंट करते हैं, उसी चीज को हम प्रिंटर कहते हैं, अर्थात उस मशीन को हम प्रिंटर कहते हैं।

स्केनर

स्केनर
स्केनर

दोस्तों स्केनर का उपयोग हम तब करते हैं, जब हमें किसी चीज को स्कैन करना होता है। मान लीजिए आपके पास कोई पेपर है, और पेपर में कुछ लिखा हुआ है। उस पेपर में लिखे हुए, जिसको आप को कंप्यूटर पर लेना है, तो आप उसको स्केनर की सहायता से स्कैन करके, सेम टू सेम आप अपने कंप्यूटर में सेव कर सकते हैं।
यह पेपर के सभी वर्ड्स को स्कैन करके या कोई छवि है, उस चीज को स्कैन करके हमें कंप्यूटर पर दिखाता है।

फैक्स मशीन

फैक्स मशीन
फैक्स मशीन

दोस्तों जब हमें किसी भी डॉक्यूमेंट को एक स्थान से दूसरे स्थान पहुंचाना होता है, तो उस अवस्था में हम जिस मशीन का उपयोग करते हैं। उस मशीन को फैक्स मशीन कहा जाता है। इसके कार्य करने की क्षमता बहुत ही तेज होती है। मान लीजिए आपके पास कोई पेपर है। उस पेपर को आपको करीब 100 किलोमीटर या हजार किलोमीटर दूर भेजना है, तो आप अपने कंप्यूटर में एक क्लिक करेंगे, और वह डॉक्यूमेंट अर्थात यह पेपर जिस कंप्यूटर में आप भेजना चाहते हैं, जितनी दूर भेजना चाहते हैं, वहां पर प्रिंट होकर निकल जाएगी।

आई.डी.ई. केबल (IDE Cable)

आई.डी.ई. केबल (IDE Cable)
आई.डी.ई. केबल (IDE Cable)

दोस्तों यह केबल आम तौर पर अपने कंप्यूटर में सीडी राइटर और डीवीडी राइटर को, कंप्यूटर से कनेक्ट करने के लिए काम में लिया जाता है, और इससे आप अपने हार्ड डिक्स को भी कनेक्ट कर सकते हैं, अपने कंप्यूटर से।

साटा केबल (SATA Cable)

साटा केबल (SATA Cable)
साटा केबल (SATA Cable)

दोस्तों पहले के जमाने में लोग आईडी केबल यूज में लेते थे। पर आज के जमाने में लोग आईडी केबल का उपयोग बहुत ही कम लेते हैं। ज्यादातर आपको साटा केबल का ही उपयोग देखने को मिलेगा। इससे आप अपने कंप्यूटर के हार्ड डिक्स तथा डीवीडी राइटर को कनेक्ट कर सकते हैं।

पावर केबल (POWER Cable)

पावर केबल (POWER Cable)
पावर केबल (POWER Cable)

दोस्तों आप मान लीजिए की आप ने कंप्यूटर बना लिया। अब उसको चालू करने के लिए पावर की जरूरत पड़ेगी। तो कंप्यूटर को पावर देने के लिए जिस केबल का उपयोग लिया जाता है। उस केबल को पावर केबल कहा जाता है। पावर केबल से ही कंप्यूटर को पावर मिलता है।

वी.जी.ए केबल (VGA Cable)

वी.जी.ए केबल (VGA Cable)
वी.जी.ए केबल (VGA Cable)

दोस्तों वी.जी.ए केबल की सहायता से आप, अपने एलसीडी, एलईडी तथा सीटीआर को अपने कंप्यूटर से अर्थात कंप्यूटर में लगे मदरबोर्ड से कनेक्ट कर सकते हैं। इसी केबल की सहायता से ही आपका एलसीडी कनेक्ट हो पाता है।

sound card

sound card
sound card

दोस्तों अगर आपके कंप्यूटर में ऑडियो पोर्ट खराब हो जाता है, तो हम साउंड कार्ड लगाकर अपने ऑडियो से संबंधित प्रॉब्लम को सॉल्व कर सकते हैं, अर्थात दूर कर सकते हैं।

ग्राफिक कार्ड (Graphic card)

ग्राफिक कार्ड (Graphic card)
ग्राफिक कार्ड (Graphic card)

 दोस्तों कुछ लोग कंप्यूटर में गेम खेलने के बड़े शौकीन होते हैं। कुछ गेम तो कंप्यूटर में चल जाते हैं। पर कुछ गेम कंप्यूटर में सपोर्ट नहीं करते हैं। उसका सबसे बड़ा कारण नहीं होता है, कि कंप्यूटर की ग्राफिक मेमोरी बहुत कम होती है। पर जब हमें हाई डेफिनेशन के गेम्स अपने कंप्यूटर में खेलने होते हैं, तो हम ग्राफिक कार्ड लगाते हैं। जिससे कि हमारे कंप्यूटर की ग्राफिक कैपेसिटी बढ़ जाती है, और हम आसानी से हाई डेफिनेशन एचडी गेम खेल सकते हैं।


extension card

extension card
extension card

दोस्तों इसका प्रयोग कंप्यूटर के साथ अन्य कंप्यूटर उपकरणों को जो जोड़ने के लिए किया जाता है। इससे इंटरफेस कार्ड भी करते हैं। अलग-अलग उपकरणों के लिए अलग-अलग इंटरफेस कार्ड का उपयोग किया जाता है।

network interface card

network interface card
network interface card

दोस्तों आमतौर पर नेटवर्क इंटरफेस कार्ड को लेन कार्ड भी कहा जाता है, इसका उपयोग ज्यादातर नेटवर्क शेयरिंग के लिए किया जाता है। इसको कुछ लोग लेन पोर्ट भी कहते हैं। इसकी सहायता से आप दो कंप्यूटर को आपस में जोड़ सकते हैं, और इसका सबसे ज्यादा उपयोग  नेटवर्किंग के लिए किया जाता है।

कम्युनिकेशन पोर्ट

कम्युनिकेशन पोर्ट
कम्युनिकेशन पोर्ट

प्रिंटर मॉडेम और स्कैनर आदि को कनेक्ट करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। यह कई प्रकार के पाए जाते हैं, जिसमें सीरियल पोर्ट भी आते हैं। पेरेलल पोर्ट भी आते हैं।

multi USB कार्ड

multi USB कार्ड
multi USB कार्ड

दोस्तों इसका उपयोग तब किया जाता है, जब हमें एक से ज्यादा यूएसबी पोर्ट की जरूरत पड़ती है। मान लीजिए आपके कंप्यूटर में दो ही यूएसबी पोर्ट है, और आपको और भी यूएसबी पोर्ट की जरूरत है। तो आप मल्टी यूएसबी कार्ड लगाकर अपने कंप्यूटर में यूएसबी पोर्ट की संख्या को बढ़ा सकते हैं।

आप ने क्या सीखा :-


दोस्तों आज के इस पोस्ट में हमने यह जाना के, एक नॉर्मल कंप्यूटर जो आम लोग यूज में लेते हैं। उस कंप्यूटर में कितने प्रकार के पार्ट्स आते हैं, वैसे तो कहीं सारे चीजों के बारे में मैंने अभी तक बताया नहीं है, कई सारे पार्ट्स के बारे में आपको बताया नहीं गया है। पर वह धीरे-धीरे आपको पता चल जाएगा जैसे-जैसे आप आगे बढ़ते रहेंगे। वैसे वैसे आप सीखते रहेंगे। तो आज का पोस्ट आपको कैसा लगा। हमें कमेंट करके जरूर बताइए।