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Monday, January 20, 2020

3:45 PM

कंप्यूटर के मदरबोर्ड का परिचय | Introduction to computer motherboard

कंप्यूटर के मदरबोर्ड का परिचय

Introduction to computer motherboard
कंप्यूटर के मदरबोर्ड का परिचय

दोस्तों आज के इस पोस्ट में हम कंप्यूटर के मदरबोर्ड के बारे में संक्षिप्त में जानेंगे, तथा कंप्यूटर के मदरबोर्ड का इतिहास जानेंगे, के कितने प्रकार के मदरबोर्ड पहले के जमाने में यूज में लिए जाते थे, और आज के जमाने में कितने प्रकार के मदरबोर्ड यूज़ में लिए जाते हैं। इसके बारे में विस्तार से हम आगे की पोस्टों में जानेंगे, पर आज का यह पोस्ट सिर्फ कंप्यूटर के मदरबोर्ड का परिचय देंगे। कि कंप्यूटर के कितने प्रकार के मदरबोर्ड पाए जाते हैं।  तो चलिए बिना वक्त गवाए, हमारा आज का यह पोस्ट स्टार्ट कर लेते हैं।

परिचय


दोस्तों शुरुआती दौर में कंप्यूटर के मदरबोर्ड का डिजाइन काफी जटिल था। उसमें हम कोई भी चीज यूज में लेने के लिए, अलग-अलग कार्ड का उपयोग करते थे।

तो उसी हिसाब से अब हम कंप्यूटर के मदरबोर्ड का मॉडल नंबर न जानक, कंप्यूटर में कौन सी CPU  लगती है, उसी के आधार पर अब हम मदरबोर्ड के बारे में जानते हैं, कि कितने प्रकार के मदरबोर्ड में कौन सा सीपीयू लगता था। क्योंकि अगर हम मॉडल नंबर के हिसाब से कंप्यूटर के मदरबोर्ड को समझेंगे तो हजारों मदरबोर्ड आपके सामने आ जाएंगे, और आप भ्रमित हो जाएंगे। अर्थात कंफ्यूज हो जाएंगे। तो इसीलिए मैं कौन से मदरबोर्ड में कौन सा सीपीयू लगता है, उसी को थोड़ा आसान भाषा में आपको समझाऊंगा।
तो चलिए अब हम मदरबोर्ड को समझते हैं, कि शुरू से लेकर अब तक कितने प्रकार के मदरबोर्ड निकल चुके हैं।

मदरबोर्ड के प्रकार


दोस्तों मदरबोर्ड मुख्य रूप से छह प्रकार के पाए जाते हैं, जो निम्न है :-


(1) AT Motherboard

(2) Mini AT Motherboard

(3) Mini ITX Motherboard

(4) Micro ATX Motherboard

(5) standard ATX Motherboard

(6) EATX Motherboard


तो दोस्तों कुल मिलाकर यह 6 प्रकार के मदरबोर्ड पाए जाते हैं, जो कि हम अपने घरों में यूज में लेते हैं, अपने कंप्यूटर में। और जो  सुपर कंप्यूटर और मिनी कंप्यूटर में यूज में लिया जाता है, वह अलग टाइप के मदरबोर्ड होते हैं, जिन के बारे में, मैं फिर कभी आपको बताऊंगा। पर अभी हम इनके बारे में ही जानेंगे।

दोस्तों अभी के लिए आप इतना समझ लीजिए, कि मदर बोर्ड के प्रकार अलग होते हैं।

और जो आप जानते हैं, वह i3, कोर i7, डुएल कोर। यह सब सीपीयू होते हैं। और मदरबोर्ड कंप्यूटर के अंदर लगे हुए  पीसीबी  अर्थात बोर्ड को  कहा जाता है, अंदर लगे हुए प्लेट को कहा जाता है।

NOTE :-

तो दोस्तों आज के इस पोस्ट में बस इतना ही था, आज के इस पोस्ट में मैंने बेसिक बातें बताई है, जो आपको जानने जरूरी है। आगे के पोस्ट में हम इन सब के बारे में एक-एक करके विस्तार से जानेंगे, और साथ ही साथ यह किस प्रकार के दिखते हैं। वह भी हम समझेंगे। तो चलिए चलते हैं, और फिर मिलेंगे अपने नेक्स्ट पोस्ट पर। 

Sunday, September 15, 2019

4:22 PM

एल.सी.डी. (LCD) और एल.ई.डी. (LED) में क्या फर्क होता है? ( Lcd And what is the difference between LED? )

एल.सी.डी. (LCD) और एल.ई.डी. (LED) में क्या फर्क होता है?

Lcd And what is the difference between LED?
Lcd And what is the difference between LED?

दोस्तों आज के इस पोस्ट में हम एल.सी.डी. और एल.ई.डी. में फर्क जानेंगे। की एल.सी.डी. और एल.ई.डी. में क्या फर्क होता है।
और कौन सा ज्यादा अच्छा है। और अच्छा है, तो क्यों अच्छा है ? इन सभी बातों के बारे में आज के इस पोस्ट में हम जानेंगे। तो चलिए बिना वक्त शुरू कर लेते हैं।

एल.सी.डी. (LCD)

LCD का full form " लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले ( liquid crystal display ) " होता है।
एल.सी.डी. में जो डिस्प्ले होता है, उस डिस्प्ले में सामने की तरफ जो लेयर होती है। उसमें आर.जी.बी. ( RGB ) कलर के तीन कलर के क्रिस्टल होते हैं, और वहीं से कलर प्रोड्यूस होता है। और इन तीन कलर के क्रिस्टल से ही नया कलर बनता है। और यह तीन कलर ही डिसाइड करते हैं, कि डिस्प्ले में एक पर्टिकुलर  जगह पर कौन सा कलर होना चाहिए। तो दोस्तों इन तीन कलर के क्रिस्टल की वजह से हमारा कलर तो प्रोड्यूस हो गया। पर बिना लाइट ( Light ) के हमें डिस्प्ले में कुछ दिखाई नहीं देने वाला है। और जब दिखाई नहीं देगा, तो इन तीनों कलर का कोई मायने ही नहीं होता। इसीलिए एल.सी.डी. में बैक साइड की तरफ सी.सी.एफ.एल. ( CCFL ) लगा होता है। जिस तरह से हमारे घरों में रोशनी करने के लिए हम सी.एफ.एल बल्ब लगाते हैं, उसी प्रकार कंप्यूटर के डिस्प्ले को रोशनी देने के लिए कंप्यूटर में जो डिस्प्ले होता है, उसके बैक साइड में सी.सी.एफ.एल. लगा होता है।
दोस्तों एलसीडी दिखने में काफी पतला होता है, और काफी आकर्षक भी होता है। पर आकर्षक होने के साथ-साथ एलसीडी में कुछ खामियां भी हैं, जो आपको पता होना जरूरी है।

एल.सी.डी. ( LCD ) की कमियां :-


दोस्तों जब आप एल.सी.डी. के सामने की तरफ बिल्कुल सीधे बैठ कर देखोगे, तो आपको जो भी डिस्प्ले में दिख रहा होगा, वह बिल्कुल साफ साफ दिखाई देगा। और जब आप एल.सी.डी. के एक साइड में हो जाएंगे। दाएं या बाएं तरफ। किसी भी एक साइड में हो जाएंगे, तो आपका एल.सी.डी. डिफोकस होने लगेगा। अर्थात उसके कलर कंट्रास्ट बिगड़ने लगेंगे, और आपको एलसीडी में कला-कला दिखाई देने लगेगा, और आपको एलसीडी साफ दिखाई नहीं देगा।
यह एल.सी.डी. की सबसे बड़ी कमी है।
अब हम एल.ई.डी. ( LED ) के बारे में जानेंगे।

एल.ई.डी. ( LED )


दोस्तों एल.ई.डी. ( LED ) का फुल फॉर्म लाइट एमिटिंग डायोड ( Light emitting diode ) होता है।
दोस्तों एल.सी.डी. और एल.ई.डी. में कोई ज्यादा डिफरेंस नहीं होता है। इसके अंदर भी वही क्रिस्टल होते हैं, जो कि लिक्विड क्रिस्टल है। सेम एल.ई.डी. में भी वही क्रिस्टल होते हैं। बस जो बैक साइट से जो हम लाइट देते हैं, वह बिल्कुल पूरे डिस्प्ले के बैक साइड में एल.ई.डी. की पैनल्स बनी होती है। और उस पैनल्स में भी जो रौशनी करने के लिए जो पैनल्स होते हैं, वह पैनल्स काफी छोटे छोटे होते हैं, जो पूरे डिस्प्ले में लगे होते हैं, और जो एल.ई.डी. होती है, वह कई सारी एल.ई.डी. एक साथ मिलकर एक ग्रुप बनाती है, और उस ग्रुप को हम एलईडी पैनल कहते हैं।
जो कि पूरे डिस्प्ले के बैक साइड में फैली होती है।

चूँ कि यह एल.ई.डी. ( LED ) है, और यह एल.ई.डी. ( LED ) काफी पतली भी बन सकती है। यही कारण है, की एल.सी.डी. से एल.ई.डी. काफी पतला होता है। और एल.ई.डी. को काफी स्लिम बनाया जा सकता है। और दूसरा जो इसमें फायदा होता है, वह यह होता है, कि एल.ई.डी. टीवी काफी कम करंट की खपत करती है। अर्थात एल.इ.डी. को चलाने के लिए काफी कम करंट की जरूरत पड़ती है। जिससे हमारे बिजली की भी बचत होती है।

note :- 


तो दोस्तों एल.सी.डी. और एल.ई.डी. में क्या फर्क होता है, आपको अब तक पता चल गया होगा। अगर आपको हमारा यह पोस्ट पसंद आया हो तो, हमें कमेंट करके जरूर बताइए। साथ ही साथ अगर आपको कोई कंफ्यूजन है, या कुछ हमसे पूछना है, या किसी टॉपिक के बारे में जानना है। किस चीज के बारे में जानना है। तो आप हमसे कमेंट करके पूछ सकते हैं। हम आपके प्रॉब्लम का सलूशन देने की पूरी तरह से कोशिश करेंगे। 

Thursday, September 5, 2019

3:31 PM

सी.पी.यू. ( CPU ) में हर्ट्ज क्या होता है ? ( What is Hertz in CPU? )

सी.पी.यू. ( CPU ) हर्ट्ज क्या होता है ?

सी.पी.यू. ( CPU ) में हर्ट्ज क्या होता है ? (What is Hertz in CPU? )
सी.पी.यू. ( CPU ) में हर्ट्ज क्या होता है ? (What is Hertz in CPU? )

दोस्तों आज के इस पोस्ट में हम यह जानेंगे, कि सीपीयू (CPU)  के ऊपर जो हर्ट्ज लिखा हुआ होता है, जो मेगाहर्ट्ज और गीगाहर्ट्स लिखा होता है, वह आखिर क्या होता है, और उनका सीपीयू में क्या काम है। तो चलिए बिना वक्गा शुरू कर लेते हैं।

दोस्तों आप कई बार दुकानों में जाते हैं, और कहते हैं, कि मुझे एक कंप्यूटर चाहिए। जो अच्छा वर्क करें। तो दुकान वाला आपको कहता है, कि आपको कौन लेना है। फिर वह आपके सामने कई सारे सीपीयू और उसकी फ्रिकवेंसी के बारे में बताता है। कि यह सीपीयू (CPU) 1 हर्ट्ज का है, यह सीपीयू (CPU) 2.3  हर्ट्ज का है। यह सीपीयू 2.5 गीगाहर्ट्ज का है। ऐसे कई सारे ऑप्शन दे देता है, और आप को बताता है, कि यह आपके लिए अच्छा होगा, पर तभी आप कंफ्यूज हो जाते हैं, कि यार आखिर गीगाहर्ट्ज क्या होता है। यह किस बला का नाम है, तो आज इसी बारे में हम इस पोस्ट में विस्तार से जानेंगे।

दोस्तों आपने कभी अगर सीपीयू देखा होगा, तो सीपीयू के ऊपर लिखा होता है, 2.5 गीगाहर्ट्ज,  3.1 गीगाहर्ट्स, 3.2 गीगाहर्ट्ज 1.5 गीगाहर्ट्ज तो चलिए हम जान लेते हैं, कि आखिर यह गीगाहर्ट्ज में हर्ट्ज क्या होता है।

गीगाहर्ट्ज में हर्ट्ज क्या होता है


दोस्तों हर्ट्ज का मतलब होता है, कि किसी चीज का बंद और चालू होना। तो सबसे पहले इसका एक साइकिल को समझ लेते है।  अगर आप एक साइकिल को अच्छे से समझ गए, तो इसका पूरा बायोडाटा जान जाएंगे।

जैसे कि डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स होता है, वह कोडिंग पर चलता है, और यह पूरा कोडिंग 0 1 0 1 पर होता है. जैसे कि आप मान लीजिए किसी चीज में आप सप्लाई देते हैं. तो वह जीरो से वन की तरफ जाता है. वन से वापस जीरो की तरफ आ जाता है। यह अप डाउन अप डाउन होता रहता है, और इसको कहते हैं हाई लो हाई लो होना। और जब पावर वन पर आता है, तो वह हाई हो जाता है। और जब पावर शून्य पर आता है, तो वह लो हो जाता है। तो हमारी फ्रिक्वेन्सी  कुछ इसी तरह कार्य करती है, तो इसका जो एक साइकल होता है, वह हाई जा कर लो की तरफ जब आता है, तब वह एक साइकिल कंप्लीट होता है। मतलब के एक बार बंद हो कर एक बार चालू होना। चाहे वह किसी भी सर्किट में पावर दे रहे हो, जब वह सर्किट एक बार बंद होकर चालू होता है, तो उसे एक साइकिल कहा जाता है। और एक साइकिल जब पूरा होता है, उसको हम 1 हर्ट्ज कहते हैं। मतलब के एक बार जब हम किसी सर्किट में पावर देते हैं, तो वह जब एक बार चालू होकर बंद हो जाता है, तो उस एक बार चालू हो के बंद होने को हम  1 हर्ट्ज कहते हैं।
तो दोस्तो आप कब तक आप को यह पता चल गया होगा, कि 1 हर्ट्ज क्या होता है।

अब हम समझेंगे कि मेगा हर्ट्ज और गीगाहर्ट्ज क्या होते हैं?

MHz or GHz kya hota he
MHz or GHz kya hota he

दोस्तों एक मेगाहर्ट्ज का मतलब होता है, वन मिलियन हर्ट्ज। और वन मिलियन का मतलब होता है, कि 10 लाख  हर्ट्ज।
उसी तरह 1 गीगाहर्ट्ज का मतलब होता है, वन बिलियन गीगाहर्ट्ज। और 1 बिलियन की गीगाहर्ट्ज का मतलब होता है, 100 करोड़ गीगाहर्ट्ज।

दोस्तों तो आप इस बात से यह अच्छे से समझ सकते हैं, कि  अगर आपके कंप्यूटर में जो सीपीयू होता है। उस सीपीयू के ऊपर अगर 1 गीगाहर्ट्ज लिखा हुआ है, तो आप इस बात से यह समझ जाइए कि, वह सी पी यू एक सेकंड में 100 करोड़ बार बंद चालू होता है। तो इस बात से आप अंदाजा लगा सकते होंगे, कि हमारे सीपीयू को कितने एक्यूरेसी के साथ काम करना पड़ता है। एक्चुअली दोस्तों हमारे सीपीयू के अंदर एक क्लॉक लगा हुआ होता है, और वह क्लॉक ही इसके हर्ट्ज को कंट्रोल करती है, कि हमारा सीपीयू कितनी बार बंद चालू होगा, 1 सेकेंड के अंदर।

उदाहरण :-

What is Hertz
What is Hertz

दोस्तों उदाहरण के तौर पर अगर मैं आपको बताऊं, तो हमारे घरों में जो बिजली आती है, वह बिजली 50 हर्ट्ज की होती है मतलब कि वह करंट 1 सेकेंड के अंदर 50 बार बंद चालू होता है। मतलब के उसका जो वोल्टेज और करंट होता है, वह जीरो से वन की तरफ जाते और वहां से वापस जीरो की तरह आता है। यह एक साइकिल की तरह होता है, जिसका इमेज आपको इस पोस्ट में देखने को मिल जाएगा, कि किस तरह से हमारा घर का जो करंट आता है जो ऐसी करंट होता है, वह किस तरह से बहता है।

मतलब के हमारे घरों में जो करंट आता है, वह 1 सेकेंड के अंदर 50 बार हाई-लो हाई-लो  होता है, पर यह इतनी तेजी से होता है, कि हमें पता नहीं चलता। मान लीजिए की हमारे घर में जो बल्ब जलता है, वह बल्ब 50 बार 1 सेकेंड के अंदर बंद चालू बंद चालू होता है। पर वह इतना फास्ट होता है, कि आपको दिखाई नहीं देता। क्योंकि एक सेकंड में अगर कोई चीज 50 बार जलती है, तो आपको दिखाई नहीं देगा। वह आपको एक समान दिखेगा।


यह जानना आपके लिए जरूरी है


 दोस्तों अब आप कहेंगे, कि जो हमारे dual-core और पेंटीअम सीरीज के सीपीयू आते थे। उसके अंदर 3 पॉइंट 3 गीगाहर्ट्स के सीपयु  आते हैं, और जो हमारा कोर I5 सीपीयू होता है, वह सीपीयू 3:1 गीगाहर्टज का होता है, तो क्या डुएल कोर सीपीयू कोर I5 सीपीयू से ज्यादा अच्छा है। क्योंकि इसमें गीगाहर्टज ज्यादा है, पर दोस्तों मैं यह बात आप को साफ कर देना चाहता हूं, कि dual-core से ज्यादा अच्छा कोर I5 सीपीयू है। क्योंकि अगर आपने मेरा पिछला पोस्ट पढ़ा होगा, तो आपको अच्छे से समझ में आ जाएगा, कि कोर i5 डुएल कोर से क्यों ज्यादा अच्छा है। आपको शॉर्ट में मैं बता देता हूं, कि सीपीयू कई सारे ट्रांजिस्टर से मिलकर बना होता है। एक सीपीयू के अंदर लाखों करोड़ों की संख्या में  ट्रांजिस्टर होते हैं। अब यह डिपेंड करता है, कि आपके सीपीयू में ट्रांजिस्टर कितना छोटा है। आपके सीपीयू में ट्रांजिस्टर जितना ज्यादा छोटा होगा, आपका सीपीयू उतना ही ज्यादा फास्ट कार्य करेगा, और जो आपके मन के अंदर जो गीगाहर्टज वाला कंफ्यूजन है, कि dual-core में गीगाहर्टज ज्यादा है, और कोर I5 में गीगाहर्टज कम है। तो आखिर कोर I5 इतना फास्ट क्यों है, और ज्यादा अच्छा क्यों है। उस चीज के बारे में मैं आपको डिटेल से बताता हूं।

dual-core से core i5 इतना फास्ट क्यों है?


एक छोटा सा उदाहरण आपको बताता हूं। कि जैसे डुएल कोर सीपीयू है, उसके अंदर मान लीजिए 2 गीगाहर्टज है। इसका मतलब यह हुआ कि डुएल कोर सीपीयू किसी काम को करने में 200 करोड़ बार बंद चालू होता है। पर कोर I5 सीपीयू उसी काम को करने में 100 करोड़ बाहर ही बंद चालू होता है। मतलब के कोर I5 सीपीयू बहुत ही कम बार बंद चालू होकर वह काम कर लेता है, जिस काम को करने में डुएल कोर सीपीयू 200 करोड़ बार बंद चालू होता है।

इस बात से आप यह कंफर्म कर सकते हैं, की आपके लिए कौन सा CPU  बेस्ट है, और एक बात आपको बता दूं, कि जितने कम बार हमारा सीपीयू बंद चालू होकर उस काम को कर लेगा। उतना ही कम बिजली हमारे कंप्यूटर को चलने में लगेगी। मतलब कि हमारा कंप्यूटर कम बिजली की खपत करेगा, और इससे आपकी बिजली भी बचेगी।


सारांश :-


दोस्तों अगर मैं शॉर्ट में आपको बताऊं तो, हमारे कंप्यूटर का सीपीयू जो होता है, उसके अंदर जो हर्ट्ज लिखा हुआ होता है। उसका मतलब यह होता है कि हमारा सीपीओ एक सेकेंड के अंदर कितनी बार बंद-चालू होता है। और एक बार बंद और चालू होने को हम 1 साईकिल कहते है, और एक साईकिल को हम 1 हर्ट्ज कहते है।

तो दोस्तों आपको हमारा यह पोस्ट कैसा लगा। हमें कमेंट करके जरूर बताइए, और साथ ही साथ अगर आपको कोई सवाल पूछना है, तो आप हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट करके पूछ सकते हैं। तो चलिए चलते हैं, और फिर मिलेंगे नेक्स्ट पोस्ट पर।
एक साईकल 

Saturday, August 31, 2019

12:08 AM

Fan capacitors are dangerous to made a 12v battery charger


Fan capacitors are dangerous to made a 12v battery charger :-

 ( 12 वोल्ट के बैटरी चार्जर बनाने के लिए फैन कैपेसिटर का इस्तेमाल है खतरनाक )
दोस्तों आज कल यूट्यूब में 12 वोल्ट की बैटरी चार्जर (12v battery charger) बनाने के लिए हजारों वीडियो मिल जाएंगे। जिसमें कैपेसिटर और डायोड की मदद से एक चार्जर बनाने की प्रक्रिया बताई जाती है। पर क्या दोस्तों यह आपके लिए सुरक्षित है, कभी आपने इस बारे में सोचा है? हमारे आज का यह पोस्ट पढ़ने के बाद आपको इस बारे में पूरी जानकारी मिल जाएगी। कृपया हमारा यह पोस्ट अच्छी तरह से पढ़ ले। तो आइए चलते हैं, आज के टॉपिक पर।
Fan capacitors are dangerous to made a 12v battery charger
Fan capacitors are dangerous to made a 12v battery charger

दोस्तों मैं आपको एक फोटो दे रहा हूं। उस फोटो में आपको एक फैन कैपेसिटर से तथा एक डायोड की मदद से 12 वोल्ट की बैटरी को चार्ज करने की प्रक्रिया को दिखाया जा रहा है। दोस्तों आपको दिखाई दे रहा होगा, की कैपेसिटर डायोड और बैटरी को एक सीरीज में रखकर एसी करंट  दिया जाता है, जिससे बैटरी चार्ज होने लगती है। पर दोस्तों इससे बैटरी चार्ज तो होती है पर बहुत तेजी से चार्ज होती है, और तेजी से चार्ज होने के बाद जब यह बैटरी पूरी तरह से चार्ज हो जाती है, तब हमारी यह बैटरी ब्लास्ट हो जाती है। इसीलिए ही मैं कहता हूं, कि इस तरह से अपने बैटरी को चार्ज ना करें।

Charger made from Fan Capacitor is deadly (12v battery charger)

( फैन कैपेसिटर से बनाया गया चार्जर है जानलेवा ) :-

दोस्तों मान लीजिए, आपके पास एक 12 वोल्ट की बैटरी ( battery ), जो की 7 एंपियर का  है। दोस्तों इस बैटरी को चार्ज करने के लिए हमारे पास ज्यादा से ज्यादा 14.1 वोल्ट से लेकर 14.4 वोल्ट तथा 1.5 एंपियर के डीसी करंट की जरूरत पड़ती है। दोस्तों अगर मैं अपने हिसाब से बताओ तो, एक 12 वोल्ट की बैटरी को चार्ज करने के लिए के लिए, ज्यादा से ज्यादा 15 वोल्ट के चार्जर की जरूरत पड़ती है, और अगर हम 15 वोल्ट से अधिक बोल्ट के चार्जर से चार्ज करते हैं, तो हमारा बैटरी खराब हो जाएगा। पर दोस्तों अगर हम फोटो के हिसाब से देखें, तो हम बैटरी ( battery )को चार्ज करने के लिए एक डायोड और फैन कैपेसिटर (fan capacitors) का इस्तेमाल कर रहे हैं। पर अगर हम इसका वोल्टेज चेक करेंगे तो हम यह पाएंगे ,कि इस मैं 100 वोल्ट तक का करंट रहा है।अब जैसा कि मैंने ऊपर बताया है, कि हम एक बैटरी ( battery ) को चार्ज करने के लिए ज्यादा से ज्यादा 15 वोल्ट तक का चार्जर ही यूज  में ले सकते हैं। अब इस बात से आप समझ ही गए होंगे के हमारे बैटरी के खराब होने या ब्लास्ट होने का क्या कारण है, इसके लिए मैं आपको एक उदाहरण देता हूं।

Examples ( उदाहरण ):-

मान लीजिए आप पांच रोटी खा सकते हैं, अगर आपको 5 के जगह 20 रोटी खिला दिया, तो आप की क्या हालत होगी। ठीक ऐसा ही हमारे बैटरी ( battery ) के साथ होता है। हम 15 बोल्ट की जगह अगर 100 वोल्ट का पावर देंगे, तो हमारा बैटरी ( battery ) जल जाएगा या ब्लास्ट हो जाएगा, पर इसमें एक ध्यान देने वाली बात यह है कि हम फैन कैपेसिटर यूज कर रहे हैं। फैन कैपेसिटर के गुण की वजह से ही हमारा बैटरी हाथो हाथ ब्लास्ट नहीं होगा या  खराब नहीं होगा। जब बैटरी पूरी तरह से चार्ज हो जाएगी, तब हमारा बैटरी ओवरलोड होने लगेगा और ब्लास्ट हो जाएगा। इसीलिए चार्जर बनाने के लिए फैन कैपेसिटर का उपयोग ना करें।

Important things to be noted( ध्यान देने योग्य बाते ):-

दोस्तों मैं यह नहीं कहता, कि आप इस तरह का ट्रिक ना करें। दोस्तों आप ऐसे ट्रिक का उपयोग कर सकते हैं, और अपनी बैटरी को फुल चार्ज होने से पहले चार्जर को निकाल सकते हैं, पर दोस्तों हमेशा आप इस तरह से चार्ज नहीं कर सकते। क्या पता गलती से आप चार्जर को सही वक्त पर चार्जिंग से निकालना भूल गए, या आपको यह पता नहीं हो कि कब आपका बैटरी पूरी तरह से चार्ज होगा। तब आपको किसी ना किसी दुर्घटना का शिकार होना  ड़ेगा। इसीलिए मैं कहता हूं, कि आप इस तरह के ट्रिक का उपयोग ना ही करें तो बेहतर होगा।

Summary ( सारांश ) :-

दोस्तों हमारे इस पोस्ट में हमने आपको यह बताया, के फैन कैपेसिटर के इस्तेमाल से हम अगर किसी बैटरी को चार्ज करते हैं, तो हमें क्या क्या नुकसान हो सकता है, और यह हमारे लिए कितना खतरनाक है।
दोस्तों अगर आपको हमारा यह पोस्ट पसंद आया, तो अपने दोस्तों को जरूर बताएं और नई नई जानकारी के लिए हमारे साथ जुड़े रहिए और हमारे नए अपडेट की जानकारी सबसे पहले पाने  के लिए हमें सब्सक्राइब करना ना भूले और सोशल मीडिया में ज्यादा से ज्यादा इसे शेयर करिए।

Tuesday, August 27, 2019

9:09 AM

multimeter full details in hindi | हिंदी में जाने (part 1)

multimeter full details in hindi | हिंदी में जाने (part 1) 


multimeter full details in hindi
multimeter full details in hindi
multimeter full details in hindi

( multimeter full details in hindi | हिंदी में जाने (part 1)  ) परिचय  :-

दोस्तों आज के इस पोस्ट में हम मल्टीमीटर के बारे में विस्तार से जानेंगे, दोस्तों हम यह भी जानेंगे के, यह किस प्रकार से कार्य करती है, और मल्टीमीटर को किस - किस जगह उपयोग में लिया जाता है।

दोस्तों पहले के जमाने में, किसी भी इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण या कॉम्पोनेंट को रिपेयर करने में काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ता था। पर जब से मल्टीमीटर का आविष्कार हुआ है, तब से किसी भी इलेक्ट्रिक उपकरण को रिपेयर करना, तथा किसी भी प्रकार की गलती या खराबी का पता लगाना काफी आसान हो गया है। दोस्तों मल्टीमीटर इलेक्ट्रिक जगत में एक नई क्रांति लेकर आया है। जिस ने इलेक्ट्रिक जगत को ही बदल कर रख दिया है। तो दोस्तों अब हम मल्टीमीटर के बारे में जानते हैं।

multimeter full details in hindi | हिंदी में जाने (part 1)    

मल्टीमीटर की शुरुआत तथा आविष्कार :-

दोस्तों मल्टीमीटर का इतिहास बहुत ही ज्यादा पुराना है, तथा इसका आविष्कार इलेक्ट्रॉनिक की दुनिया में एक नई क्रांति लेकर आई। दोस्तों मल्टीमीटर की शुरुआत 1820 में ही हो गई थी। 1820 में करंट डिटेक्टिंग के लिए एक डिवाइस का आविष्कार किया गया था। उस डिवाइस का नाम गैल्वेनोमीटर रखा गया था। यह शुरुआती दौर का पहला मल्टीमीटर था।
Galvanometer
Galvanometer 
Galvanometer
यह आकार में बहुत ही बड़ा था, और यह वोल्टेज और रजिस्टेंस की वैल्यू तो बताता ही था, पर यह बिल्कुल सटीक वैल्यू नहीं बता पाता था, क्योंकि यह बहुत धीरे-धीरे कार्य करता था, और धीरे होने की वजह से वैल्यू बदल जाती थी। बाद में 1920 के दशक में मल्टीमीटर का आविष्कार, रेडियो रिसीवर के रूप में किया गया। यह मल्टीमीटर आकार में काफी छोटा था। इसके कार्य करने की क्षमता काफी तेज थी, और यह बिल्कुल सटीक वैल्यू बताती थी। इस मीटर को बनाने का श्रेय पोस्ट ऑफिस इंजीनियर डॉनल्ड माकाड़ी को दिया जाता है।

मल्टीमीटर के प्रकार :-

दोस्तों आजकल मल्टीमीटर कई प्रकार के पाए जाते हैं, यह मल्टीमीटर कई प्रकार के रंग तथा आकार के पाए  हैं, और उनके अलग-अलग प्रकार के करंट तथा वैल्यू को बताने की क्षमता होती है। कुछ मल्टीमीटर हैवी वोल्टेज को दर्शाने के लिए होते हैं, तो कुछ आम वोल्टेज को दर्शाने में मदद करते हैं, पर मुख्य रुप से मल्टीमीटर दो प्रकार के होते हैं।

यह दो प्रकार के मल्टीमीटर निम्न है :-
एनालॉग मल्टीमीटर
डिजिटल मल्टीमीटर

मल्टीमीटर का उपयोग :-

 दोनों मल्टीमीटर के कार्य प्रणाली अलग अलग होती है। दोस्तों मल्टीमीटर की सहायता से हम करंट वोल्टेज तथा रजिस्टेंस को माप सकते हैं। मल्टीमीटर का उपयोग हम, सभी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक सर्किट तथा सभी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक्स कॉम्पोनेंट को रिपेयर करने, तथा उस में आई हुई खराबी का पता लगाने के लिए कर सकते हैं। अगर आपको किसी भी इलेक्ट्रिक उपकरण को रिपेयर करना है, तो आपको मल्टीमीटर को उपयोग में लेने का  ही तरीका पता होना आवश्यक है।
दोस्तों पहले के जमाने में या में यू कहु के, कुछ दशकों पहले कोई भी इंजीनियर या मैकेनिक किसी भी सर्किट या इलेक्ट्रिक उपकरण को, रिपेयर करने के लिए एनालॉग मल्टीमीटर को उपयोग में लेता था। यह एनालॉग  मल्टीमीटर में एक प्वाइंटर तथा एक सुई होती थी, जो कि वोल्टेज तथा रजिस्टेंस को दर्शाता था। पर यह  मल्टीमीटर बिल्कुल सही सही वैल्यू नहीं बता पाती थी, इसलिए इसकी जगह लोग डिजिटल मल्टीमीटर को उपयोग में लेने लगे। यह मल्टीमीटर उपयोग में लेने में बहुत ही आसान थी, और यह बिल्कुल सही सही वैल्यू बता देती थी। इस मल्टीमीटर के अंदर हमें एक डिस्पले भी मिल जाता है, जहां पर हम किसी भी वैल्यू को प्वाइंट्स में भी देख सकते हैं, और हमें एक सटीक वैल्यू का पता चल जाता है। इस कारण से ही इस मल्टीमीटर का उपयोग आज के युग में सबसे ज्यादा होता है।

note :-

दोस्तों आज के इस पोस्ट में बस इतना ही। दोस्तों आगे की पोस्ट में हम यह जानेंगे, कि मल्टीमीटर को उपयोग में कैसे लिया जाता है। जिसका लिंक मैं नीचे दे दूंगा। दोस्तों मैं चाहता तो इस एक ही पोस्ट में, मैं सब कुछ बता सकता था। पर यह पोस्ट काफी बड़ा बन जाता, और पढ़ने वाला बोर हो जाता। इसलिए मैंने इस पोस्ट को कुछ भागों में बांट दिया है, उन सभी भागो का लिंक में आपको नीचे दे दूंगा।

Monday, August 26, 2019

4:38 PM

12 volt battery charger is unsafe

12 volt battery charger is unsafe without a transformer (in Hindi)

बैटरी चार्जर ट्रांसफॉर्मर के बिना असुरक्षित है (हिंदी में)
12 volt battery charger is unsafe
12 volt battery charger is unsafe 

दोस्तों आजकल सभी जगह 12-volt की बैटरी आसानी से मिल जाती है। दोस्तों यह बैटरी कई सारी कंपनी में मिल जाती है। पर इनमें से सबसे ज्यादा प्रचलित लुमिनस बैटरी है, जो कि 7 ah  वाली बैटरी है।
दोस्तों लुमिनस बैटरी की कीमत लगभग 800 रुपये पड़ती है. लेकिन बहुत जगह पर 12-volt battery ( बैटरी) का चार्जर उपलब्ध नहीं होता है। दोस्तों तब हमारे जहन में एक सवाल आता है, कि आखिर हम इसका चार्जर कहां से खरीदें। फिर हमें बड़ी बैटरी को चार्ज करने वाले चार्जर को खरीदना पड़ता है। जिसकी कीमत लगभग हजार रुपए होती है। यानी की 800 रुपये की बैटरी को चार्ज करने के लिए हमें हजार रुपये का चार्जर खरीदना पड़ता है।
अब दोस्तों 800 रुपये की बैटरी के लिए हजार रुपये का चार्जर कौन खरीदना चाहेगा, इसलिए हम सोचते हैं, कि कहीं से कम कीमत में चार्जर मिल जाए।
फिर हम सोशल मीडिया में या इंटरनेट के बाकी वेबसाइट में अपना चार्जर ढूंढने लग जाते हैं।

12 volt battery note:-

दोस्तों कुछ लोगों का यह भी मानना होता है, कि बिना ट्रांसफार्मर के भी सस्ता 12-volt battery ( बैटरी ) चार्जर बनाया जा सकता है। हालांकि लोगों की यह सोच बिल्कुल सही है, कि बिना ट्रांसफार्मर के भी 12 volt battery ( बैटरी ) चार्जर बनाया जा सकता है।
लेकिन आपको पता होना चाहिए,कि बिना ट्रांसफार्मर का चार्जर न तो आपके बैटरी के लिए, और न ही आपके परिवार के सदस्यों के लिए  सुरक्षित है।और दोस्तों आज के जमाने में यूट्यूब में कुछ ऐसे यूट्यूब चैनल वाले हैं, जो
कि सिर्फ 50 रुपये में , एक 12-volt battery ( बैटरी ) चार्जर बनाने का दावा करते हैं, और वास्तव में वह 12-volt battery ( बैटरी ) चार्जर बनाकर आपको प्रमाण भी दिखा देते हैं। परंतु दोस्तों यह जाहिर सी बात है कि अगर सामने वाला को 50 रुपये  में कोई बैटरी चार्जर बना कर दे रहा है, तो वह अच्छी क्वालिटी का तो नहीं हो सकता। हां कामचलाऊ हो सकता है, पर दोस्तों ऐसे बैटरी चार्जर बनाने से आप की बैटरी की लाइफ कम हो सकती है,और आपके परिवार के सदस्यों के लिए यह एक असुरक्षित चार्जर के रूप में आपके सामने आ सकता है, और किसी दुर्घटना की भी आशंका इससे बनी रहती है।इसलिए मेरी राय यह है कि आप ऐसे चार्जर ना बनाए।
दोस्तों इसका मतलब यह नहीं है, के सारे यूट्यूब चैनल वाले आपको फेक वीडियो दिखाते हैं। मैं यह कहना चाहता हूं, कि यूट्यूब पर जो ट्रिक दिखाई जाती है, वह ट्रिक अगर आप घर पर करना चाहते हैं, तो वह ट्रिक किसी अच्छे इलेक्ट्रीशियन की गाइड लाइन के अंदर ही बनाएं, और उसको टेस्ट करें।

सोचने वाली बात :-

दोस्तों सोचने  वाली बात इसमें यह है, कि हमेशा वह इलेक्ट्रिशियन आपके साथ तो नहीं हो सकता। अब मान  जिए ,अब आप अपनी बनाए चार्जर से किसी  बैटरी को चार्ज कर रहे हैं, और इस बैटरी मैं अचानक या उस चार्जर में कोई खराबी आ जाए तो दुर्घटना के जिम्मेदार कौन होगा। इसीलिए मेरा यह कहना है, कि आप जानकारी के लिए ऐसे वीडियो जरूर देखें, पर हमेशा के लिए यूज़  में आने वाले चार्जर के रूप में इस चार्जर का उपयोग ना करें।
यह आपके लिए बहुत ही खतरनाक हो सकता है, और मैं तो यह भी मानता हूं, कि जो यूट्यूब चैनल वाले ऐसे  वीडियो बनाते हैं, वह खुद भी ऐसे चार्जर को अपने खुद के लिए उपयोग में नहीं लेते हैं, और फिर बाद में वह अपने बैटरी को ट्रांसफार्मर वाली नॉरमल बैटरी से चार्ज करते हैं। पर वह लोग यह नहीं समझते है, कि उसके इस ट्रिक से कितने लोगों को जानलेवा चार्जर बनाने का संदेश दे रहा है। उनको तो सिर्फ पैसों से और अपने सब्सक्राइबर्स से मतलब है।
दोस्तों मुझे उनसे कोई शत्रुता नहीं है, और ना ही मुझे यह सब आपको बता कर कोई फायदा होने वाला है। मैं  आपको होने वाले किसी बड़ी दुर्घटना से आपको बचा रहा हूं। आपको एक और चीज बता दूं , के उनके वीडियो में काफी कमियां होती है। इस वजह से मैं उनके ऐसी वीडियो का विरोध करता हूं। मैं नहीं चाहता कि उनके ऐसे वीडियो से किसी का कोई नुकसान हो।

सार :-

वीडियो देख कर जो 12-volt battery ( बैटरी ) चार्जर बनाए जाते है। उन से जो खतरा होता है, उन खतरों के बारे इस पोस्ट में विस्तार से बताया गया है। दोस्तों अगर आप को हमारा यह पोस्ट पसंन्द आया हो तो, अपने दोस्तों को हमारे ब्लॉग के बारे में जरूर बताए। और नई जानकारी के लिए हमारे साथ जुड़े रहिये।

Sunday, August 25, 2019

8:40 PM

ohm's law definition (Hindi)

दोस्तों आज हम  Ohm's law के बारे में जानेंगे, के यह क्या होता है,
और इसका उपयोग किस प्रकार से होता है।
दोस्तों सामान्य तौर पर Ohm's law के बारे में किसी से पूछा जाता है,
तो वह सामान्य रूप से बता देता है, कि Ohm's law का मतलब होता है :- V = I x R
पर दोस्तों,मैं यह बता दूं, कि सिर्फ इतना जानने से कोई फायदा नहीं होता है, इसलिए मैं आज इस पोस्ट में Ohm's law को विस्तार से समझाने जा रहा हूं, और हम इस पोस्ट में यह जानेंगे के Ohm's law का उपयोग कहां पर होता है, और इससे हम वोल्टेज और एम्पीयर्स का पता कैसे लगा सकते हैं, इसको हम एक उदाहरण के द्वारा समझेंगे, के Ohm's law कैसे काम में लिया जाता है।

दोस्तों नीचे में एक फोटो दे रहा हूं, उस फोटो की मदद से हम Ohm's law को समझेंगे।
ohm's law definition (Hindi)
ohm's law definition (Hindi)

दोस्तों सामान्य तौर पर लोग जानते हैं, कि Ohm's law का सूत्र V = I x R होता है, इसमें v वोल्टेज होता है, और I करंट होता है, तथा आई में एंपियर इसका यूनिट होता है, तथा R का मतलब रजिस्टेंस होता है। दोस्तों अब हम Ohm's law की परिभाषा जानेंगे।

Ohm's law full definition:-

यदि भौतिक अवस्था, जैसे कि गर्मी, लंबाई आदि स्थिर हो,
तब किसी विदुत परिपथ में प्रतिरोध के सिरों पर उत्पन्न वोल्टेज,
उच्च प्रतिरोध में प्रवाहित होने वाली धारा के समानुपाती होता है।
तो दोस्तों मुझे लगता है, कि आपको Ohm's law की परिभाषा ठीक से समझ में नहीं आया।
वह इसलिए समझ में नहीं आया, क्योंकि यह एक किताबी परिभाषा है, और अब मैं इस परिभाषा को एक उदाहरण के रूप में आपको समझाता हूं।
इस उदाहरण से पहले आप यह समझ ले,
कि Ohm's law के सूत्र को तीन प्रकार से उपयोग में ले सकते हैं :-
v = I x r
I = v/r
r = v/r
दोस्तों इन 3 सूत्रों का मतलब यह है, कि अगर आपके पास वोल्ट, एम्पीयर और रेजिस्टेंस वैल्यू में से, किसी 2 के वैल्यू के बारे में पता है, तो आप इन तीनों सूत्र की मदद से आप, उस तीसरे का वैल्यू पता कर सकते हैंऔर एक रेजिस्टेंस
जैसे :-
अगर आपको वोल्टेज के बारे में पता है, और रजिस्टेंस के बारे में, तो आप एंपियर के बारे में आसानी से पता कर सकते हैं।

तो दोस्तों अब चलते हैं हम उदाहरण के ऊपर :-

ohm's law definition (Hindi)
battery - led connection with ohm's law

इस उदाहरण को समझने के लिए हमारे पास कुछ वस्तुएं होनी चाहिए, जैसे 9 वोल्ट की बैटरी और एक 2 वोल्ट और 20 mA की LED, और एक रेजिस्टेंस।
दोस्तों अब बैटरी को ओहंस लॉ के जरिए, LED को कनेक्ट करना है, और LED को जलाना है।
अब जैसा कि मैंने बताया की हमारे पास 2v और 20 mA की LED है,
और बैटरी 9 वोल्ट की है। दोस्तों LED अलग - अलग बोल्ट और एंपियर की पाई जाती है, पर हम 2 वोल्ट और 20 mA की LED इस्तेमाल कर रहे हैं। अब हम 9 वोल्ट की बैटरी से इस LED को कैसे चलाते हैं, वह देखते हैं।
दोस्तों LED मैं हमेशा दो टर्मिनल होते हैं, एक ( + ) का तथा दूसरा ( - ) का होता है।
दोस्तों अब हम किसी तार की सहायता से बैटरी को LED के साथ कनेक्ट करते हैं।
कनेक्ट करने के लिए हम तार के एक सिरे को बैटरी के ( + ) में जोड़ते हैं,
तथा दूसरे सिरे को LED के ( + ) में जोड़ते हैं, तथा दूसरा एक और तार लेते हैं,
और उस पार के एक सिरे को बैटरी के ( - ) में जोड़ते हैं, और दूसरे सिरे को LED के ( - ) में जोड़ते हैं। ध्यान रखें कि प्लस हमेशा प्लस से ही जुड़ता है, और ( - ) हमेशा ( - ) से ही जुड़ता है।
अब हमने दोनों सिरों को आपस में जोड़ दिया है, अब हम देखेंगे की LED फ्यूज हो जाती है,
दोस्तों LED के फ्यूज होने का कारण यही था, कि बैटरी तो हमारे पास 9 वोल्ट की है, पर LED सिर्फ 2 वोल्ट की इसका मतलब के 9 - 2 = 7 बोल्ट LED को ज्यादा मिल रहा है, और ज्यादा वोल्टेज की वजह से ही LED फ्यूज हो गया।

Ohm's law की मदद से led जलाना :-

ohm's law definition (Hindi)
Ohm's law की मदद से led जलाना

इस जगह ओहंस लॉ का नियम काम में आता है,
और ओहंस लॉ की मदद से हम एक रेजिस्टेंस को लगाएंगे।
रजिस्टेंस की जरूरत इसलिए है, क्योंकि हमें LED को चलाने के लिए सिर्फ 2 वोल्ट की जरूरत है, और बाकी अतिरिक्त वोल्ट को हमें खत्म करना है, तो अब हमें रजिस्टेंस की वैल्यू कितनी चाहिए, इसका पता हम Ohm's law की मदद से लगाएंगे।
फोटो की मदद से आप रजिस्टेंस की वैल्यू पता कर सकते हैं।
चित्र के अनुसार हमारे पास अब 350 Ohm's का रजिस्टेंस आता है, और इस रजिस्टेंस को हमें बैटरी के प्लस में जोड़ना है,
रजिस्टेंस को जोड़ने के बाद LED जलने लगेगा।
तो दोस्तों इस प्रकार से हम Ohm's law के नियम को समझ सकते हैं।